वॉशिंगटन, 19 अपै्रल। अमेरिकी इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को ट्रंप प्रशासन के लिए एक संभावित खतरा बताया है. इसके पीछे वजह ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे संबंध बताए गए हैं.
रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल अहमद सईद ने बताया कि मुनीर के ईरान के ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों के साथ निजी संबंध थे. इनमें मारे गए कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी और आईआरजीसी कमांडर हुसैन सलामी शामिल थे.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक महत्वपूर्ण गुप्त मध्यस्थ के रूप में मुनीर की भूमिका को देखते हुए इन संबंधों की गहन जांच हो रही है. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से मुनीर की प्रशंसा करते हुए उन्हें अपना पसंदीदा फील्ड मार्शल बताया है, लेकिन खुफिया अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी दोहरी भूमिका अमेरिकी हितों को खतरे में डाल सकती है.
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान का विश्वासघाती सहयोगी (विशेष रूप से अफगानिस्तान में) के रूप में इतिहास ईरान के साथ उनके घनिष्ठ समन्वय को सुरक्षा के लिए खतरा बनाता है. विश्लेषक अफगानिस्तान में पाकिस्तान के इतिहास की ओर इशारा करते हैं, जहां इस्लामाबाद ने अमेरिकी सहायता प्राप्त करते हुए तालिबान का समर्थन किया था और इसे सावधानी बरतने का एक कारण बताते हैं.
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी के बिल रोगियो ने बताया, ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. अफगानिस्तान में पाकिस्तान एक धोखेबाज सहयोगी था. मुनीर के आईआरजीसी से संबंधों को ट्रंप प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा खतरे का संकेत माना जाना चाहिए.
एफडीडी के विश्लेषकों ने तर्क दिया कि मुनीर ट्रंप के साथ अपने अच्छे संबंधों का इस्तेमाल शायद ईरानी हितों की रक्षा करने के लिए, या पाकिस्तान को एक ऐसे जरूरी, लेकिन अविश्वसनीय बिचौलिए के तौर पर मजबूत करने के लिए कर रहे हैं, जिसके बिना काम न चल सके. पाकिस्तानी विश्लेषक रजा रूमी ने कहा कि मुनीर का उदय इस बात को दिखाता है कि पाकिस्तान में सेना, नागरिक नेतृत्व पर लगातार हावी होती जा रही है.
मुनीर वर्तमान में ट्रंप प्रशासन (विशेष रूप से जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ) और तेहरान के बीच बैक-चैनल (गुप्त) संचार को सुगम बना रहे हैं. ट्रंप ने शांति वार्ता आयोजित करने में शानदार काम करने के लिए मुनीर को सार्वजनिक रूप से श्रेय दिया है, जबकि दूसरी ओर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में पाकिस्तान में चल रही वार्ताओं से यह कहते हुए वॉकआउट कर दिया था कि ईरान परमाणु मामलों पर कोई ठोस प्रतिबद्धता देने से इनकार कर रहा है.
यह स्थिति प्रशासन के भीतर अभी भी विवाद का एक विषय बनी हुई है, जहाँ एक तरफ ट्रंप की कठोर कूटनीति के प्रति पसंद है, तो दूसरी तरफ खुफिया समुदाय का मुनीर की क्षेत्रीय निष्ठाओं के प्रति संशयपूर्ण दृष्टिकोण है.
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