सुलतानपुर 21 अप्रैल (आरएनएस)। शहर में अवैध निर्माण, अतिक्रमण और बढ़ते जाम के खिलाफ उठी आवाज अब प्रशासनिक जांच तक पहुंच गई है, लेकिन इस जांच की निष्पक्षता पर शुरुआत से ही सवाल खड़े होने लगे हैं। अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता रविन्द्र प्रताप सिंह द्वारा सौंपे गए शिकायती पत्र पर एडीएम (एफआर) राकेश सिंह ने संज्ञान लेते हुए जांच कमेटी का गठन किया है, मगर इस कमेटी की संरचना ही चर्चा का विषय बन गई है।
शिकायत में साफ आरोप है कि शहर के कई इलाकों में बिना मानचित्र स्वीकृति, बिना पार्किंग और नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला इमारतें और कॉम्प्लेक्स खड़े किए जा रहे हैं। नतीजा- संकरी होती सड़कें, रोज का जाम और बढ़ते हादसे। गोलाघाट से लेकर चौक घंटाघर, लखनऊ रोड से लेकर सीताकुंड तक, संदिग्ध निर्माणों की लंबी फेहरिस्त प्रशासन को सौंपी गई है।
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है जिस व्यवस्था पर मिलीभगत का आरोप है, उसी व्यवस्था के जिम्मेदार लोगों को जांच की कमान सौंप दी गई है। जांच कमेटी में अपर उपजिलाधिकारी सदर करन सिंह, नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लालचंद्र सरोज और नगर कोतवाल संदीप राय को शामिल किया गया है। अब सवाल यही है कि जिन पर शहर में अवैध निर्माण को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं, वही अब जांच की कुर्सी पर बैठकर सच तलाशेंगे। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि क्या यह जांच महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी? क्योंकि शिकायत में यह भी आरोप है कि विनियमित क्षेत्र कार्यालय अक्सर नोटिस जारी कर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल देता है, जबकि निर्माण कार्य जारी रहता है।
पार्किंग विहीन कॉम्प्लेक्स, सड़क किनारे खड़े वाहन और अतिक्रमण से जूझता शहर पूछ रहा है क्या इस बार सच में कार्रवाई होगी, या फिर फाइलों में ही सिमट जाएगी पूरी कवायद? अधिवक्ता की मांग है कि पिछले दस वर्षों में हुए सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और दोषियों पर एफआईआर दर्ज हो। लेकिन जिस तरह की कमेटी बनाई गई है, उसने इस पूरे मामले को और ज्यादा संदेह के घेरे में ला दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सुलतानपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ यह कार्रवाई वास्तव में बदलाव लाती है या फिर यह भी सिस्टम की एक और रूटीन प्रक्रिया बनकर रह जाती है।
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