—- बुद्धा पार्क में डेट गेम, इंजीनियर गायब, जांच अधिकारी परेशान।
—- बुद्धा पार्क में भ्रष्टाचार की बू: जांच अधिकारी को में नहीं मिला डीपीआर।
कुशीनगर, 21 अप्रैल (आरएनएस)। जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट के ठीक सामने स्थित बुद्धा पार्क में लगभग पांच करोड़ रुपये से कराए जा रहे निर्माण कार्य में अब भ्रष्टाचार का संकेत सिर्फ आरोप व चर्चाओं तक सीमित नहीं रह गया हैं, क्योंकि सरकारी रिपोर्ट ने गड़बड़ी की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। आई जी आर एस शिकायत पर हुई जांच में जिला उद्यान अधिकारी की रिपोर्ट ने जो तस्वीर पेश की है वह न सिर्फ प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे है। बल्कि पूरे सिस्टम की निष्क्रियता, मिली भगत और लीपापोती को उजागर करती है।
जिला उद्यान अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच आख्या के अनुसार 27 फरवरी 2026 को प्रान्तीय खंड कसया के अवर अभियंता के साथ जिला मुख्यालय रवीन्द्र नगर स्थित बुद्धा पार्क में निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया। मौके पर मौजूद सुपरवाइजर फिरोज खान से जब डीपीआर, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी गई तो उन्होंने साफ कहा कि डीपीआर मेरे पास नहीं, साइट इंजीनियर के पास है।
फोन पर संपर्क करने पर साइट इंजीनियर ने खुद को अवकाश पर बताते हुए 28 फरवरी तक लौटकर निरीक्षण कराने का भरोसा दिया। लेकिन यहीं से शुरू हुआ तारीख पर तारीख का खेल। फिर साइट इंजिनियर की ओर से 7 मार्च व 9 मार्च की नई तारीख तय की गयी। इसके बावजूद साइट इंजिनियर द्वारा निर्धारित तिथि पर न तो जांच अधिकारी को निर्माण स्थल का निरीक्षण कराया गया और न ही डीपीआर उपलब्ध करायी गयी। परिणाम स्वरूप पूरा मार्च महीना बीत गया। सूत्रों के मुताबिक बार -बार आश्वासन के बावजूद साइट इंजीनियर न तो मौके पर उपस्थित हुए, न ही कोई अभिलेख उपलब्ध कराया। जिससे जांच कर रहे अधिकारी भी निराश नजर आए।सवाल यह है कि आखिरकार एक जिम्मेदार पद पर तैनात साइट इंजीनियर लगातार जांच से बचने की कोशिश क्यों कर रहे है?।
सूत्रो की माने तो जिलाधिकारी द्वारा गठित एक अन्य जांच टीम जब निर्माण स्थल का निरीक्षण किया, तो वहां की स्थिति ने और भी चौंका दिया। निरीक्षण में पाया गया कि इंटरलॉकिंग कई जगहों पर धंस चुकी है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है और कई तकनीकी खामियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। अधिकारियों ने मौके पर ही साइट इंजीनियर को जरुरी निर्देश दिए लेकिन यह कार्रवाई भी औपचारिकता से आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि जिस डीपीआर के आधार पर पांच करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। वही दस्तावेज आईजीआरएस जांच के दौरान जांच अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह स्थिति न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है। बल्कि यह भी संकेत है कि कहीं न कहीं निर्माण कार्य मे खेला हुआ है। ऐसे में यह आशंका और भी गहरा जाती है कि पूरे प्रोजेक्ट में धन के दुरुपयोग और बंदरबांट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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