-सिविल डिफेंस अयोध्या के सेक्टर वार्डन डॉ उपेंद्र मणि त्रिपाठी ने प्रशिक्षण कार्यशाला में आग बुझाने के उपायों पर दी प्रस्तुति
अयोध्या 22 अप्रैल (आरएनएस)। गर्मी के दिनों में आग लगने की खबरें बहुतायत आती हैं जिससे अपेक्षित जन धन साधन सभी की हानि हो जाती है, ऐसे में सजगता के साथ बचाव के या तात्कालिक प्राथमिक उपायों से आग लगने या होने वाले नुकसान से बचाव किया जा सकता है। इसी विषय पर हुए प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतिम सत्र में प्रस्तुति देते हुए अयोध्या के नागरिक सुरक्षा संगठन के सेक्टर वार्डन और वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ उपेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा आग , ज्वलनशील पदार्थ या ईंधन, आवश्यक उच्च ताप, और ऑक्सीजन गैस के संयोग से होने वाली ऐसी प्राकृतिक रसायनिक प्रक्रिया है जिसमें सब राख हो जाता है।अत: इससे बचने या नियंत्रण पाने के उपायों में रसायनिक क्रिया के इन्हीं आवश्यक घटकों का समन्वय तोडऩा प्राथमिक उद्देश्य होना चाहिए। डॉ उपेन्द्र मणि ने कहा ध्यान देने योग्य बात है कि ऑक्सीजन स्वयं नहीं जलती किंतु आग जलने के लिए उच्च ताप की सहायक है, किंतु ईंधन के ज्वलनशील पदार्थ अपनी ठोस द्रव एवं गैस की अवस्थानुसार आग की तीन श्रेणियां हो सकती हैं , कभी कभी धातु एक चौथे प्रकार की अग्नि कारक के रूप में लिया जा सकता है। इस प्रकार ठोस पदार्थ जैसे कपड़े के ग_र,रुई, दफ्ती ,लकड़ी,गत्ते,सूझे कूड़े या पत्तियों के ढेर , घास फूस के छप्पर, सूखी खड़ी फसलें, दुकानों, घरों , विद्यालयों , व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों में फर्नीचर आदि के निकट बिजली के तारों में होने वाले शॉर्ट सर्किट से उत्पन्न चिंगारी, बीड़ी सिगरेट या किसी सुलगती दियासलाई, अगरबत्ती, रस्सी, सुतली के संपर्क में आए कपड़े, जूट, कागज, हवन या बुझे चूल्हे से उठी चिंगारी के संपर्क में आई सूखी घास फूस आदि के संयोग से अथवा द्रव जैसे ज्वलनशील कोई भी पेट्रोलियम, तैलीय, पदार्थ, घी, कपूर ,बत्ती , आदि या ज्वलनशील गैस जैसे एलपीजी, सीएनजी, पीएनजी गैसों का रिसाव, कूड़े के ढेर में उत्पन्न होने वाली गैसों के उच्च ताप में सुलगने से पदार्थ की अवस्था अनुसार आग लगने की अधिक संभावना रहती है। डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने कहा यदि हम उपरोक्त कारणों को जानते लेते हैं तो यह समझना सरल हो जाता है कि आग के व्यापक होने से पूर्व चिंगारी लगते ही या शुरू होते ही धैर्य और संयम से सावधानी पूर्वक उपाय किया जाय तो बहुत प्रकार की आग की भयावहता या उससे होने वाली हानि को रोका जा सकता है, इन्हें ही सम्मिलित रूप से फायर फस्र्ट एड तकनीक कह सकते हैं। सदैव ध्यान रखना चाहिए कि आग लगने में जरूरी समन्वय को तोडऩा पहला उद्देश्य है जिसमें दबाव एक महत्वपूर्ण तकनीक है जो ज्वलनशील पदार्थ की सतह एवं आग की लपटों का संपर्क तोड़ सकती है। डॉ उपेन्द्र ने आग बुझाने के तरीकों पर तकनीकी चर्चा करते हुए बताया ठोस पदार्थ की आग को कूलिंग मेथड, ईंधन हटाकर स्टारवेसन मेथड या आग को भूखों मारने के तरीके अर्थात गैस से दबाव बनाकर आग का गला घोंटने की तकनीक अपनाते हुए नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने उदाहरणों से समझाया घरों में यदि गैस सिलेंडर,या सीएनजी सिलेंडर में लीकेज से आग लगे तो गीले कम्बल को चारों तरफ से लपेट दें, दबाव बनते ही और ऑक्सीजन का संपर्क टूटते ही आग बुझ जाएगी। घरों होटलों में बिजली के तारों से लगने वाली आग में सबसे पहले बिजली का कनेक्शन तोडऩा, इस हेतु मेन स्विच ऑफ, या लकड़ी के डंडे से कनेक्शन तोड़कर साफ सूखी रेत डालना चाहिए। खेतों खलिहानों में या रुई गत्ते कूड़े कपड़े के ग_र दुकान, ऐसी जगहों पर भी बिजली कनेक्शन हटाने के साथ आग के संपर्क से शेष हिस्से को बचाने के लिए उन्हें दूर करना, खेत के बाहर की तरफ सूखी फसल हटाना ,पानी की खाई बना देना, मिट्टी जमा कर देना,साथ ही प्रेशर के साथ पानी डालना जिससे तापमान घटे। हमें अपने घरों, वाहनों,होटलों, प्रतिष्ठानों में पानी,कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का , फोम या झाग वाला , अथवा मोनो अमोनियम फॉस्फेट पावडर के फायर एक्सटिंग्यूशर अवश्य रखना चाहिए जिनसे आग लगते ही तत्काल आग पर कुछ ही सेकंडों में काबू पाया जा सकता है। बिजली से या इलेक्ट्रानिक उपकरणों में लगी आग में गैस वाला, द्रव या तेल पेट्रोलियम में फॉम वाला या पावडर वाला उपकरण अधिक उपयोगी रहता है। आग से बचाव के अन्य जरूरी उपायों पर चर्चा करते हुए डॉ उपेन्द्र मणि त्रिपाठी ने बताया प्रतिष्ठानों में खुली जगह में कॉरिडोर, या दिखने वाली निकट जगहों पर पानी और साफ रेत से भरी बाल्टियां भी रखनी चाहिए। चार पांच फिट के लकड़ी अथवा बांस में लोहे की मजबूत जाली से आग वाली जगह को पीटकर बुझाने का उपकरण बना सकते हैं। ऊंची इमारतों, भवनों में फायर डक्ट बनाना चाहिए जिसमें पानी की टंकी से प्रेशर पंप जोड़कर, एक लोहे की पाइप नीचे तक ले जाते हैं जिससे प्रत्येक मंजिल पर एक फ्री घूमने वाली घिरनी से प्लास्टिक की 20-30 फुट की होजरील पाइप लगाई जाती है जिसमें नाजिल खोलते ही प्रेशर के साथ पानी छिड़काव कर आग बुझाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे ही महानगरीय क्षेत्रों में पानी की मेन सप्लाई पाइप में कुछ दूरी पर हौज प्वाइंट या फायर पॉइंट बनाया जा सकता है जिससे अकस्मात स्थितियों में अग्निशमन वाहन या हौज रील पाइप जोड़कर पानी का छिड़काव कर बढ़ती आग पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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