-गौ सेवा ही सुशासन का आधार, निराश्रित गौवंश के संरक्षण में सरकार की संवेदनशील पहल
अयोध्या 22 अप्रैल (आरएनएस)। भीषण गर्मी के बीच गोवंशों की स्थिति का जायजा लेने उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ला रामनगरी अयोध्या पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर जनपद की गौशालाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। महेश कुमार शुक्ला ने कहा कि भीषण गर्मी और हीट वेव को देखते हुए गौशालाओं में पानी, छाया और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर गौशाला में पर्याप्त पेयजल और बचाव के उपाय किए जाएं ताकि गोवंशों को गर्मी से राहत मिल सके। उन्होंने स्थानीय लोगों और किसानों की सहभागिता पर जोर देते हुए कहा कि जन सहयोग से ही गौशालाओं को बेहतर और समृद्ध बनाया जा सकता है। इसके लिए आसपास के किसानों को जोड़कर जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। उपाध्यक्ष ने यह भी कहा कि कई जगहों पर गौशालाओं के केयरटेकर, ग्राम प्रधान और सचिवों में अनुभव की कमी देखी गई है, इसलिए उन्हें प्रशिक्षण और जागरूक करना बेहद जरूरी है, ताकि व्यवस्थाएं बेहतर ढंग से संचालित हो सकें। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में गौशालाओं का निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है और हर जिले में व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर मुसलमान को गाय का मांस खाना चाहिए, प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग समाजों की अलग मान्यताएं हैं। कुछ लोग गाय को गौ माता मानते हैं कुछ लोग पशु मानते हैं और कुछ लोग भोजन मानते हैं, उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग का कार्य केवल प्रदेश में गोवंशों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना है, अन्य राज्यों के मामलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उपाध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य है जहाँ निराश्रित गौवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा 50 रुपये की दर से भरण-पोषण की धनराशि उपलब्ध करायी जा रही है। प्रदेश सरकार की महत्त्वाकांक्षी गौ-संरक्षण नीति के अन्तर्गत वर्तमान में राज्य के विभिन्न जनपदों में 7,700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल सक्रिय रूप से संचालित हो रहे है। इन आश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आवास, नियमित आहार, स्वच्छ पेयजल तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। यह व्यवस्था न केवल गौवंश के संरक्षण को सुनिश्चित कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एंव सामाजिक संतुलन को भी सुदृढ़ कर रही है। इस योजना के अन्तर्गत अब तक 1,67,065 गौवंश इच्छुक एव जिम्मेदार गौपालकों को सुपुर्द किए गये है। सरकार द्वारा प्रत्येक गौवंश के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की दर से पोषण भत्ता सीधे गौपालकों के बैंक खातों में डीवीटी के माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है। यह पहल न केवल गौवंश के संरक्षण में सहायक है, बल्कि गौपालकों की आय वृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वहीं अयोध्या में जिला प्रशासन द्वारा गौ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में 97 गौ-आश्रय स्थल क्रियाशील है, जिनमें 12,433 गौवंश का संरक्षण एंव पालन-पोषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 1441 प्रगतिशील गौपालकों ने सहभागिता योजना के अन्तर्गत 2571 गौवंश को अपनाकर सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार उ0प्र0 गोवध निवारण अधिनियम 1955 के अन्तर्गत गौवंश के सुरक्षा के प्रति पूर्णत प्रतिबद्ध है। जीरो टॉलरेंस नीति: गौवंश संरक्षण से सम्बन्धित नियमों के उल्लंघन पर त्वरित एवं कठोर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। कुछ असामाजिक एवं निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार का खण्डन करते हुए उपाध्यक्ष गो सेवा आयोग महेश शुक्ल के द्वारा बताया गया कि गौ सेवा के पदाधिकारियों के द्वारा गौ-आश्रय स्थलों का नियमित भ्रमण करते हुए निरन्तर पैनी निगाह रखी जा रही है और कोई भी अनियमितता प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है। राज्य सरकार गौवंश के प्रति अपनी संवेदनशीलता मानवीय एवं समर्पित दृष्टि के साथ सुशासन के सिद्धांतों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सर्किट हाऊस सभागार में जनपद स्तरीय गो संरक्षण एवं अनुश्रवण समिति की समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह, अपर निदेशक ग्रेड-2 अयोध्या मंडल डॉ ए के वैस, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ इंद्र देव माहर उपस्थित रहे।
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