रांची 23 अप्रैल (आरएनएस)। समाहरणालय स्थित ‘क्चÓ ब्लॉक के कक्ष संख्या 307 में आज स्कूली बसों एवं छोटे वाहनों (विशेषकर स्कूल वैन) के संचालन से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन (छ्वक्क्र) के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया, जिसमें संगठन के अध्यक्ष अजय राय ने भाग लेते हुए अभिभावकों की ओर से कई महत्वपूर्ण सुझाव एवं गंभीर चिंताएं रखीं। पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से बैठक में प्रवक्ता संजय श्रॉफ संजीव दत्ता गौरीशंकर कुमार राहुल कुमार राय शामिल हुए.अजय राय ने बैठक में विशेष रूप से स्कूल वैन की खराब और असुरक्षित स्थिति पर कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जहां बसों पर थोड़ी बहुत निगरानी होती है, वहीं वैन में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है — ओवरलोडिंग, बिना फिटनेस, बिना परमिट और बिना किसी सुरक्षा मानक के बच्चों को ढोया जा रहा है, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
बैठक में दिए गए प्रमुख सुझाव:
स्कूल वैन पर विशेष निगरानी और कार्रवाई:
स्कूल वैन की स्थिति सबसे अधिक खराब है, इसलिए इनके खिलाफ विशेष अभियान चलाकर बिना फिटनेस, बिना परमिट और ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर तत्काल कार्रवाई हो।
सभी बसों और वैन का नियमित फिटनेस चेकअप हो, और वैध कागजात के बिना कोई वाहन न चले। सभी चालकों एवं सहायकों का पुलिस वेरिफिकेशन हो तथा उनके व्यवहार और ट्रेनिंग की समय-समय पर समीक्षा हो। हर वाहन में अनिवार्य सुरक्षा मानक,ष्टष्टञ्जङ्क, त्रक्कस्, फायर एक्सटिंग्विशर, फस्र्ट एड किट, स्पीड गवर्नर जैसी सुविधाएं बसों के साथ-साथ वैन में भी अनिवार्य की जाएं।
हर स्कूली वाहन (बस या वैन) में एक जिम्मेदार व्यक्ति/स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित हो। ओवरलोडिंग पर जीरो टॉलरेंस नीति साथ ही क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने वाले वाहनों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो।
जिला और स्कूल स्तर पर हेल्पलाइन/शिकायत तंत्र विकसित किया जाए, जिससे अभिभावक तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें।
अजय राय ने कहा कि सबसे ज्यादा खतरा आज स्कूल वैन से है, जहां छोटे-छोटे वाहनों में ठूंस-ठूंस कर बच्चों को बैठाया जा रहा है। यह सीधे तौर पर बच्चों की जान से खिलवाड़ है। प्रशासन को बस के साथ-साथ वैन पर भी उतनी ही सख्ती दिखानी होगी, तभी व्यवस्था सुधरेगी। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन ने प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यदि स्कूल वैन पर विशेष फोकस के साथ सख्ती से नियम लागू किए गए, तो बच्चों की सुरक्षा में वास्तविक सुधार संभव होगा।
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