नई दिल्ली 25 April, – देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए जल्द ही राहत भरी खबर आने वाली है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) अपने सिस्टम में बड़ा डिजिटल बदलाव करने जा रहा है, जिसके तहत PF (प्रोविडेंट फंड) निकालना पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।
मिनटों में PF निकासी संभव
अभी तक PF निकालने के लिए लोगों को कई दिन इंतजार करना पड़ता है और कई बार क्लेम रिजेक्ट होने की परेशानी भी सामने आती है। लेकिन नए सिस्टम के लागू होने के बाद कर्मचारी Unified Payments Interface (UPI) के जरिए कुछ ही मिनटों में पैसा अपने बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। यह सुविधा EPFO के अपग्रेडेड डिजिटल प्लेटफॉर्म CITES 2.0 (EPFO 3.0) के जरिए शुरू की जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया तेज, पेपरलेस और पारदर्शी बनेगी।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
नई व्यवस्था के तहत यूजर को अपने UAN (Universal Account Number) से EPFO पोर्टल या ऐप पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद OTP के जरिए वेरिफिकेशन किया जाएगा और फिर अपनी UPI ID दर्ज करनी होगी। जैसे ही प्रक्रिया पूरी होगी, PF की राशि तुरंत बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी। यानि अब PF निकालना उतना ही आसान हो जाएगा जितना मोबाइल से UPI पेमेंट करना।
कितनी राशि निकाल सकेंगे?
नए नियमों के अनुसार, कर्मचारी अपने PF खाते से अधिकतम 75% तक राशि निकाल सकेंगे।
कम से कम 25% पैसा खाते में रखना अनिवार्य होगा, ताकि रिटायरमेंट के लिए बचत सुरक्षित बनी रहे।
सरकार का उद्देश्य
इस बदलाव के पीछे सरकार के दो मुख्य लक्ष्य हैं—
जरूरत के समय कर्मचारियों को तुरंत आर्थिक सहायता मिल सके
रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त बचत सुरक्षित रहे
इसके साथ ही EPFO सिस्टम को आधुनिक और टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
EPFO से जुड़े अहम आंकड़े
EPFO के पास इस समय करीब 7.98 करोड़ सदस्य और 82 लाख से अधिक पेंशनर्स जुड़े हुए हैं। बड़ी संख्या में खाताधारकों की KYC प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। अगर आपके UAN में नाम, जन्मतिथि या अन्य जानकारी में कोई गलती है, तो उसे EPFO पोर्टल पर ‘Manage’ सेक्शन में जाकर ‘Modify Basic Details’ के जरिए आसानी से सुधारा जा सकता है।
शिकायत और सहायता सुविधा
EPFO ने शिकायतों के समाधान के लिए भी व्यवस्था मजबूत की है। कर्मचारी किसी भी तरह की समस्या या भ्रष्टाचार की शिकायत ऑनलाइन विजिलेंस पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा ‘प्रयास’ जैसी योजनाओं के जरिए विशेष शिविर और ऑनलाइन सहायता भी दी जा रही है।

