देहरादून,28 अपै्रल (आरएनएस)। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और श्रमिक संगठनों ने मंगलवार को एलिवेटेड रोड परियोजना, उत्तराखंड आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण, श्रम कानूनों समेत कई मुद्दों को लेकर विधानसभा कूच किया। इस दौरान पुलिस से उनकी नोकझोंक भी हुई। विधानसभा सत्र के दौरान विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता हरिद्वार रोड पर एकत्रित हुए और विधानसभा कूच किया। पुलिस ने रिस्पना पुल के समीप बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना को जनविरोधी बताते हुए तत्काल रद्द करने की मांग की। कहा कि राज्य आंदोलन में छूटे हुए आंदोलनकारियों का पुन: चिन्हीकरण किया जाए। साथ ही उत्तराखंड में राज्य श्रम कानूनों को लागू करें। वक्ताओं ने कहा कि रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड 26 किमी लंबी परियोजना है। यह हजारों परिवारों के विस्थापन का कारण बनेगी। वहीं, उन्होंने कहा कि छूटे हुए आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण वर्ष 2004-05 के प्रारंभिक मापदंड के तहत किया जाए। रुद्रपुर सहित प्रदेश की फैक्ट्रियों में श्रमिक उत्पीडऩ रोका जाए। उन्हें न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये किया जाए। प्रदेश में श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए और मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए। स्कीम वर्करों को कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। पिछले छह माह से फ्रीज श्रम कानूनों को तुरंत बहाल किया जाए।इस दौरान प्रदर्शन के बाद संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीएम अर्पणा डौंडियाल को ज्ञापन सौंपा। मौके पर अनंत आकाश, लेखराज, प्रमिला रावत, नवनीत गुसाईं, सुरेश कुमार, अमित परमार, विकास रावत, वालेश बबानिया, भगवंत पयाल, अभिषेक भंडारी, रविंद्र नौडियाल, एनएस पंवार, सतीश धौलाखंडी, सुमिता रावत आदि मौजूद थे।ये संगठन हुए शामिलप्रदर्शन में बस्ती बचाओ आंदोलन, उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद, सीआईटीयू, यूकेडी, राष्ट्रीय उत्तराखंड पार्टी, आयूपी, नेताजी संघर्ष समिति सहित कई संगठन शामिल हुए।
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