# हैदराबाद स्थित जनस्वास्थ्य संस्थान ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, डिजिटल हेल्थ क्षमता और ‘वन हेल्थ’ तैयारियों में अधिक निवेश की जरूरत बताई
हैदराबाद, 30 जून, (आरएनएस)। भारत स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसके बावजूद, देश के सामने एक बड़ी चुनौती अब भी बनी हुई है। भविष्य में आने वाली स्वास्थ्य आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारत के पास पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ नहीं हैं। यह बात PHFI इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ साइंसेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के कार्यवाहक कुलपति डॉ. एम. विष्णु वर्धन राव ने अपने लेख “इंडियाज़ नेक्स्ट हेल्थ क्राइसिस: इट इज़ नॉट अ डिज़ीज़, इट इज़ अ वर्कफोर्स गैप” में कही है। डॉ. राव ने लेख में लिखा है कि भारत ने अस्पतालों और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने में बड़ा निवेश किया है, लेकिन देश में आज भी ऐसे प्रशिक्षित विशेषज्ञों की भारी कमी है जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों को रोकने, उनका प्रबंधन करने और समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम हों । कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए डॉ. राव लिखते हैं कि भारत ने कम समय में अस्पतालों और क्रिटिकल केयर सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया, लेकिन महामारी के दौरान एपिडेमियोलॉजिस्ट, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधकों, डेटा वैज्ञानिकों और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जुटाना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। उन्होंने लिखा है कि ऐसे कुशल कार्यबल को तैयार करने के लिए वर्षों तक लगातार निवेश और मजबूत संस्थागत सहयोग की जरूरत होती है। डॉ. राव ने लेख में लिखा है कि इस वर्ष भारत का स्वास्थ्य बजट 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, उनका कहना है कि केवल अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र बनाना ही पर्याप्त नहीं है। बेहतर नतीजे तभी मिलेंगे, जब प्रशिक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी उपलब्ध हों। ये विशेषज्ञ लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की योजनाएं बनाते हैं, स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं, बीमारियों के फैलाव पर नजर रखते हैं और स्वास्थ्य तंत्र को लोगों से जोड़ने का काम करते हैं। हैदराबाद स्थित PHFI इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ साइंसेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) भारत का जनस्वास्थ्य शिक्षा और शोध के लिए समर्पित पहला और एकमात्र डीम्ड विश्वविद्यालय है। यह शिक्षा, शोध, कौशल विकास और नीति निर्माण में सहयोग के माध्यम से देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने और भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए भारत को तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
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