मानसा (पंजाब),29 अपै्रल (आरएनएस)। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. मानसा की एक कोर्ट ने मानहानि के एक पुराने केस में मुख्यमंत्री के बार-बार गैरहाजिर रहने पर कड़ा रुख अपनाया है.
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजिंदर सिंह नागपाल ने साफ कर दिया है कि अगर भगवंत मान 1 मई को होने वाली अगली सुनवाई में खुद पेश नहीं होते हैं, तो उनकी बेल कैंसिल कर दी जाएगी और उनकी मौजूदगी पक्की करने के लिए सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे.
पूरा मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुए राजनीतिक बवाल से जुड़ा है. जब मानसा से आम आदमी पार्टी के विधायक नजर सिंह मानशाहिया 25 अप्रैल 2019 को आम आदमी पार्टी छोड़कर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे. मानशाहिया के कांग्रेस में शामिल होने के दो दिन बाद, संगरूर से उस समय के सांसद और पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संगरूर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि मानशाहिया 10 करोड़ रुपये के लालच और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष बनने के वादे पर कांग्रेस में शामिल हुए थे.
नजर सिंह मानशाहिया ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया. उन्होंने भगवंत मान से अपने आरोप साबित करने या माफी मांगने को कहा. कोई जवाब न मिलने पर, मानशाहिया ने 30 जुलाई, 2019 को मानसा कोर्ट में भगवंत मान और कुछ मीडिया संस्थानों के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दाखिल किया.
कोर्ट ने दिसंबर 2020 में भगवंत मान को समन जारी किया था. लंबी प्रक्रिया के बाद, भगवंत मान 20 अक्टूबर 2022 को मुख्यमंत्री के तौर पर मानसा कोर्ट में पेश हुए और उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिल गई. 26 मार्च 2025 को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले में नामजद पत्रकारों और संपादकों के खिलाफ कार्रवाई यह कहते हुए खारिज कर दी कि उन्होंने सिर्फ एक सार्वजनिक व्यक्ति के बयान की रिपोर्टिंग की थी और उनका मानशाहिया को बदनाम करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन भगवंत मान के खिलाफ मामला अभी भी चल रहा है.
28 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भगवंत मान 20 अक्टूबर 2022 के बाद से एक बार भी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं. मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में जरूरी बैठक का हवाला देते हुए व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए आवेदन किया था. कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे ‘अस्पष्ट आधार’ मुख्यमंत्री के अदालती कार्यवाही के प्रति अडिय़ल रवैये और व्यवहार को दिखाते हैं. जज ने कहा कि आरोपी के लगातार गैरहाजिर रहने की वजह से केस आगे नहीं बढ़ पा रहा है.
कोर्ट ने इस बार आखिरी मौका देते हुए आगे के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 1 मई, 2026 तय की है और मुख्यमंत्री भगवंत मान को खुद पेश होने के सख्त आदेश दिए हैं. दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया गया है. अब यह देखना अहम होगा कि मुख्यमंत्री कोर्ट में पेश होते हैं या विधानसभा सत्र में अपनी व्यस्तता का हवाला देकर फिर से व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगते हैं, क्योंकि कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि पेश न होने पर उनकी बेल कैंसिल हो सकती है.
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