लखनऊ 30 अप्रैल (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में नारी सशक्तिकरण के मुद्दे पर आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सत्र आधी आबादी को समर्पित है और इसका उद्देश्य महिलाओं के स्वावलम्बन तथा सशक्तिकरण में बाधक कारकों की पहचान कर उन्हें दूर करने का मार्ग प्रशस्त करना है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की विधानसभा इस दिशा में देश को नई दिशा देने की क्षमता रखती है और यह समय आत्ममंथन का है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लोकसभा में 17 अप्रैल को महिला सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव का समर्थन न करके समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी ने नारी गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने इसे देश की आधी आबादी के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया और कहा कि इस आचरण से पूरा देश आहत हुआ है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते वर्षों में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से अब तक महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलम्बन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। इन प्रयासों का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में तेजी से बढ़ी है और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां मिली हैं।मुख्यमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023Ó को महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि वर्तमान में संसद में महिलाओं की भागीदारी लगभग 15 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश विधानसभा में 11-12 प्रतिशत के बीच है, जिसे बढ़ाकर कम से कम 33 प्रतिशत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि यह लक्ष्य हासिल किया जाता है, तो महिलाओं की प्रभावी उपस्थिति 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिससे नीति निर्धारण और कानून निर्माण में उनकी भूमिका सशक्त होगी।उन्होंने पूर्व की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अतीत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर चुनौतियां रही हैं, लेकिन आज प्रदेश में नारी सुरक्षा के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2016 की तुलना में 2025 तक हत्या के मामलों में 43 प्रतिशत, दहेज मृत्यु में 19 प्रतिशत तथा दुष्कर्म से जुड़े मामलों में 67 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने इसे सरकार की सख्त कानून-व्यवस्था और संवेदनशील नीतियों का परिणाम बताया।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में मात्र 13 प्रतिशत महिलाएं कार्यबल का हिस्सा थीं, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई हैं। यह बदलाव न केवल महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने का संकेत है, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति का भी आधार बना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के चलते उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में पहुंचा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में करोड़ों शौचालयों का निर्माण कर महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य की रक्षा की गई। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाखों परिवारों को आवास मिला, जिनमें बड़ी संख्या में आवास महिलाओं के नाम पर आवंटित किए गए।मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजनाÓ, ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनाÓ, ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजनाÓ और ‘आयुष्मान भारत योजनाÓ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि ‘लखपति दीदी योजनाÓ और बीसी सखी जैसे नवाचार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं और उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ रहे हैं।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं, तो उन्हें राजनीतिक शक्ति भी मिलनी चाहिए, ताकि वे नीति निर्धारण में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।अंत में मुख्यमंत्री ने सदन के सभी सदस्यों से अपील की कि वे इस विशेष सत्र में सक्रिय भागीदारी करें और नारी सशक्तिकरण के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का समर्थन करते हुए महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने में योगदान दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह चर्चा न केवल सदन की गरिमा को बढ़ाएगी, बल्कि प्रदेश और देश में नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक नई ऊर्जा और संकल्प का संचार करेगी।
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