रायगढ़ 2 मई (आरएनएस) धरमजयगढ़ के ट्रैक्टर हादसे में अब सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि साक्ष्य छुपाने का बड़ा खेल उजागर हुआ है—रायगढ़ पुलिस की जांच में सामने आया कि मौत के बाद असली ट्रैक्टर ही बदल दिया गया और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई, जिससे एक साधारण हादसा गंभीर आपराधिक मामले में बदल गया। 2 मई 2026 को सामने आए इस खुलासे में एसएसपी शशि मोहन सिंह ने मीडिया रिपोर्ट्स पर तत्काल संज्ञान लेते हुए SDOP धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी को जांच सौंपी, और जांच में जो तथ्य सामने आए उन्होंने पूरे घटनाक्रम की तस्वीर बदल दी। 29 अप्रैल 2026 को अम्बेटिकरा निवासी कमल सिंह मांझी ने थाना धरमजयगढ़ में सूचना दी थी कि लक्ष्मीपुर निवासी फुलजेंस मिंज, उम्र 46 वर्ष, अपने ट्रैक्टर को मांड नदी में धोने ले गया था, जहां उसके साथ सहेसराम मांझी भी मौजूद था, इसी दौरान हाइड्रोलिक पाइप फटने से ट्रॉली अचानक नीचे गिर गई और उसकी चपेट में आकर सहेसराम मांझी के सिर में गंभीर चोट लगी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई, लेकिन घटना के बाद जो हुआ वही इस मामले को सनसनीखेज बना देता है। पुलिस को घटना की जानकारी करीब दो घंटे देरी से दी गई, जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां एक हरे रंग का ट्रैक्टर और लाल ट्रॉली खड़ी मिली, मृतक का शव ट्रॉली के नीचे से निकालकर तौलिए से ढककर रखा गया था, मौके पर मौजूद गवाहों ने भी उसी वाहन से हादसा होना बताया, लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो खुलासा हुआ कि आरोपी फुलजेंस मिंज ने साक्ष्य छुपाने के इरादे से असली लाल रंग के महिंद्रा ट्रैक्टर को घटनास्थल से हटाकर उसकी जगह दूसरा ट्रैक्टर खड़ा कर दिया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके और अपनी जिम्मेदारी से बचा जा सके। पुलिस की सूक्ष्म जांच में यह साजिश सामने आने के बाद आरोपी फुलजेंस मिंज, निवासी लक्ष्मीपुर, थाना धरमजयगढ़, जिला रायगढ़, उम्र 46 वर्ष के खिलाफ अपराध क्रमांक 116/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) (लापरवाही से मृत्यु कारित करना) और धारा 238 (साक्ष्य छुपाना) के साथ मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 184 में मामला दर्ज कर लिया गया है और विवेचना जारी है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने सख्त चेतावनी दी है कि किसी भी घटना में सच्चाई छुपाने, साक्ष्य मिटाने या पुलिस को गुमराह करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल, यह मामला साफ संकेत देता है कि हादसे के बाद की चालाकी अपराध को और गहरा बना देती है—और कानून की पकड़ से बच पाना अब नामुमकिन होता जा रहा है।


