महासमुंद,02 मई (आरएनएस)। में गैस घोटाले का ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया—सुपुर्दनामे में सुरक्षित रखने के लिए दिए गए 6 गैस कैप्सूल से 90 मीट्रिक टन से ज्यादा, करीब डेढ़ करोड़ रुपये की गैस गायब कर दी गई और उसे बाजार में ऊंची कीमत पर खपाया गया। 2 मई 2026 को सामने आए इस मामले में थाना सिंघोड़ा के अपराध क्रमांक 42/26 में पुलिस ने जांच शुरू की तो परत-दर-परत एक बड़ी साजिश उजागर होती चली गई, दिसंबर 2025 में जब्त किए गए 6 रुक्कत्र कैप्सूल ट्रकों को सुरक्षा कारणों से 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग के अधिकारियों—खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी और मनीष यादव—की मौजूदगी में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर पिता मूलसिंह ठाकुर उम्र 56 वर्ष निवासी ग्राम उरला थाना अभनपुर जिला रायपुर को सुपुर्द किया गया था, इसके बाद कैप्सूल को सिंघोड़ा से अभनपुर स्थित प्लांट ले जाया गया, लेकिन यहीं से शुरू हुआ खेल। पुलिस जांच में सामने आया कि 31 मार्च से 5 अप्रैल 2026 के बीच एक-एक कर सभी कैप्सूल खाली कर दिए गए, 31 मार्च की रात दो कैप्सूल, 1 अप्रैल को एक, 3 अप्रैल को एक और 5 अप्रैल को दो कैप्सूल से गैस निकाली गई, हर कैप्सूल में औसतन 17 टन गैस थी और कुल मिलाकर करीब 100 टन गैस को अवैध रूप से प्लांट के बुलेट और निजी टैंकरों में ट्रांसफर कर दिया गया, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि सुपुर्दनामे के तुरंत बाद कैप्सूल का वजन नहीं कराया गया, 200 किलोमीटर के रास्ते में कई धर्मकांटे होने के बावजूद वजन नहीं कराया गया और 6 से 8 अप्रैल के बीच तब तौल कराया गया जब कैप्सूल पूरी तरह खाली हो चुके थे, और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर दिए गए। पुलिस ने जब दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि अप्रैल महीने में कंपनी ने सिर्फ 47 टन गैस खरीदी लेकिन 107 टन गैस बेच दी, यानी 60 टन गैस ऐसी बेची गई जो कभी खरीदी ही नहीं गई थी, साफ है कि यह चोरी की गैस थी जिसे कच्चे बिल और कच्चे रजिस्टर में दर्ज कर बाजार में बेचा गया, इतना ही नहीं रायपुर की 6 से 8 एजेंसियों ने भी 4 से 8 टन तक गैस खरीदकर इस गबन को खपाने में मदद की, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्लांट के कर्मचारी मालिक और मैनेजर के आदेश पर गैस खाली करने की बात स्वीकार चुके हैं, वहीं कंपनी से जुड़े कई अहम रजिस्टर और रिकॉर्ड गायब पाए गए जिससे साफ है कि साक्ष्य मिटाने की कोशिश भी की गई, विषय विशेषज्ञ की जांच में यह भी पुष्टि हुई कि इतनी बड़ी मात्रा में गैस का लीकेज होना संभव नहीं है और सभी कैप्सूल पूरी तरह फिट पाए गए, जिससे यह पूरी घटना सुनियोजित अपराध साबित होती है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(3), 61, 238, 3(5) के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7 तथा आईटी एक्ट की धाराएं लगाई हैं, कार्रवाई के दौरान 7 रुक्कत्र कैप्सूल टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 से अधिक कमर्शियल गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, मोबाइल, सीसीटीवी डीवीआर और बड़ी मात्रा में दस्तावेज जब्त किए गए हैं, इस पूरे मामले में अब तक आरोपी निखिल वैष्णव पिता तोरण दास वैष्णव उम्र 41 वर्ष निवासी उपर पारा अभनपुर जिला रायपुर को गिरफ्तार किया गया है जबकि मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और अन्य डायरेक्टर व मैनेजर फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है। यह पूरा मामला न सिर्फ करोड़ों के गबन का है बल्कि उस समय गैस की कालाबाजारी का भी है जब बाजार में गैस की कमी थी और आरोपियों ने डेढ़ से दो गुना कीमत लेकर अवैध बिक्री की, बहरहाल यह केस साफ दिखाता है कि सिस्टम में थोड़ी सी लापरवाही कैसे बड़े घोटाले में बदल जाती है—और अब सवाल यही है कि फरार आरोपी कब तक बच पाएंगे, क्योंकि पुलिस की जांच तेज है और शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।
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