रायगढ़, 03 मई (आरएनएस)। 03 मई—गुमशुदगी के अंधेरे में खो चुके 251 लोग जब अचानक अपने घरों की चौखट पर लौटे तो यह सिर्फ पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के लिए उम्मीद की वापसी थी, अप्रैल महीने में चलाए गए ऑपरेशन तलाश के तहत रायगढ़ पुलिस ने रिकॉर्ड सफलता हासिल करते हुए 36 नाबालिगों सहित कुल 251 गुम इंसानों को सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों से मिलाया, यह पूरा अभियान एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में चला, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, डीएसपी उन्नति ठाकुर समेत सभी थाना प्रभारियों ने दिन-रात एक कर दिया, गुम नाबालिगों के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई और पुलिस टीमें रायगढ़ से निकलकर पंजाब के जालंधर, अंबिकापुर, डभरा और चंद्रपुर तक पहुंचीं, हर सुराग को खंगाला गया, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र का सहारा लिया गया और आखिरकार बच्चों को सकुशल वापस लाया गया, जिन मामलों में बहला-फुसलाकर भगाने या शोषण की पुष्टि हुई वहां आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की गई, जूटमिल थाना क्षेत्र में विकास यादव नामक आरोपी ने नाबालिग को बहला कर ले जाकर शारीरिक शोषण किया, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा, वहीं एक अन्य मामले में सनत कुमार भट्ट ने नाबालिग को जालंधर तक ले जाकर अपराध किया, उसे भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, पूंजीपथरा थाना ने अंबिकापुर से 15 वर्षीय बालिका को बरामद किया और आरोपी पर गंभीर धाराएं लगाईं, कोतवाली पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर डभरा से 13 वर्षीय बालिका को खोज निकाला, आरोपी रमेश यादव शादी का झांसा देकर उसे ले गया था, जिसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, पूरे जिले में थाना लैलूंगा ने सबसे ज्यादा 42 गुम इंसानों को खोजकर रिकॉर्ड बनाया, चक्रधरनगर ने 29, जूटमिल ने 27, पूंजीपथरा ने 24, कोतवाली और पुसौर ने 23-23 मामलों में सफलता पाई, वहीं भूपदेवपुर थाना ने अपने यहां दर्ज सभी नाबालिग मामलों को सुलझाकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया, इस अभियान ने न सिर्फ पुलिस की सक्रियता दिखाई बल्कि यह भी साबित किया कि समय पर कार्रवाई और संवेदनशीलता से हर खोया व्यक्ति वापस लाया जा सकता है, एसएसपी शशि मोहन सिंह ने साफ संदेश दिया कि नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जो भी बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाएगा या उनका शोषण करेगा, उस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई तय है, साथ ही अभिभावकों से भी बच्चों की गतिविधियों और सोशल संपर्कों पर नजर रखने की अपील की गई है, बहरहाल रायगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ आंकड़ों की सफलता नहीं बल्कि उन 251 परिवारों की कहानी है जिनके घरों में फिर से खुशियों की रोशनी लौटी है।
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