रांची 5 मई (आरएनएस)। झारखंड तंजीम के केंद्रीय अध्यक्ष शमशेर आलम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने स्ढ्ढक्र के मुद्दे को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार से मुलाकात की।प्रतिनिधिमंडल ने स्ढ्ढक्र से संबंधित विभिन्न समस्याओं और चिंताओं को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष रखा। श्री शमशेर आलम ने कहा कि इस मुद्दे पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। ताकी कोई भी योग्य मतदाता अपने मतदान से वंचित ना रहे। इस प्रतिनिधिमंडल में फहीम अहमद, वसीम अख्तर एवं मो फिरोज आलम शमील थे।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष मुख्य मांगे रखी गयी।
1. समय दिया जाए- नाम जोडऩे, जांच करने और आपत्ति सुनने के लिए कम से कम 3-4 महीने का समय दिया जाए। क्चरुह्र को बिना जल्दबाजी के काम करने का समय मिले।
2. दस्तावेज आसानी से मानें-आधार कार्ड को जरूरी मान लिया जाए। अगर आधार या अन्य दस्तावेज ना हो, तो राशन कार्ड, डछत्म्ळ। जॉब कार्ड, बैंक पासबुक, पुराना वोटर स्लिप, स्कूल सर्टिफिकेट आदि को भी स्वीकार किया जाए। अगर कोई दस्तावेज नहीं जुटा पाता, तो उसके स्व-घोषणा (एफिडेविट) और पड़ोसियों के बयान पर भी नाम जोड़ा जाए। नाम काटने से पहले एक और मौका जरूर दिया जाए।
3. नाम काटने से पहले सूचना दें- किसी का भी नाम बिना बताए और बिना कारण बताए ना काटा जाए। नाम कटने वालों की पूरी सूची (कारण सहित) गांवध्मोहल्ले में और वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से लगाई जाए।
4. नाम जोडऩे की प्रक्रिया आसान हो- इसके लिए स्नशह्म्द्व-6 ऑन लाइन और आफ लाइन दोनों तरीकों से आसानी से भरा जा सके। ट्रिब्यूनल (नाम जोडऩे की अदालत) में सुनवाई के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। गरीब, आदिवासी, महिलाओं और अनपढ़ लोगों के लिए विशेष मदद कैंप लगाए जाएं। सभी पार्टियों के एजेंट्स को पूरी भागीदारी दी जाए ताकि कोई भेदभाव न हो।
5. क्चरुह्र अधिकारियों को साफ निर्देश दें- कि वे सिर्फ फार्म भरवाने और जांच करने का काम करें। अनावश्यक दस्तावेज न मांगें। अगर कोई क्चरुह्र भेदभाव करता है या गलत तरीके से नाम काटता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो।
6. झारखंड के आदिवासी इलाकों, दूर दराज के गांवों और खनन क्षेत्रों में मोबाइल कैंप लगाए जाएं। 18 साल पूरे करने वाले युवाओं को विशेष अभियान चलाकर जोड़ा जाए।
7. पूरी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक रखें हर महीने बताएं कि कितने नाम जुड़े और कितने कटे। इसका कारण भी बताएं। अंतिम सूची बनाने से पहले लोगों से राय ली जाए।
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