राँची 6 मई (आरएनएस)। झारखंड राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के विश्वविद्यालयों के लिए बनाएं गए नियम – परीनियम में कलस्टर कॉन्सेप्ट पर विशेष फोकस किया गया है जो छात्र हित में उचित नहीं है। उक्त विषय को लेकर आज दिनांक 06 मई को डोरंडा महाविद्यालय शिक्षक संघ एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज के मुख्य गेट पर कला बिल्ला लगाकर एक दिवसीय धरना का आयोजन किया गया।
धरना के दौरान शिक्षक एवं कर्मचारी ने अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कलस्टर कॉन्सेप्ट छात्र हित में सही नहीं है एवं इसके लागू होने से प्रत्येक महाविद्यालय में पढऩे वाले छात्र – छात्राओं की संख्या पर व्यापक असर पड़ेगा। धरना में वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020 लागू है एवं शिक्षा को विकेंद्रीकरण का प्रयास किया जा रहा है जिसमें मल्टिपल एंट्री एवं मल्टिपल एग्जिट की व्यवस्था है एवं जिसके अंतर्गत छात्र छात्राओं को अपने मूल विषय (मेजर) के साथ अपने मनपसंद माइनर को लेना पड़ता है । जिस महाविद्यालय में कला या वाणिज्य या विज्ञान संकाय में छात्र छात्राएं नामांकन लेंगे उन्हें अन्य विषयों के लिए संबंधित दूसरे महाविद्यालयों में अध्ययन हेतु जाना पड़ेगा। उदाहरण स्वरूप डोरंडा महाविद्यालय, रांची को विज्ञान संकाय हेतु चयनित किया गया है अगर छात्र, छात्राएं केवल विज्ञान संकाय में मेजर की कक्षाएं करेंगे परंतु माइनर हेतु उन्हें दूसरे महाविद्यालय में पढऩे जाना होगा। कलस्टर कॉन्सेप्ट लागू होने से महाविद्यालयों में छात्र – छात्राओं की संख्या में अप्रत्याशित कमी होगी जबकि उच्च शिक्षा द्वारा जी ई आर ( ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो)को बढ़ाने की बात कही जाती रही है।
झारखंड राज्य के महाविद्यालयों में दूर दराज से निर्धन छात्र भी पढऩे आते हैं उन्हें पढ़ाई हेतु एक से ज्यादा महाविद्यालयों में पढ़ाई के लिए जाना होगा तो उन्हें आर्थिक बोझ से गुजरना पड़ेगा। डोरंडा महाविद्यालय शिक्षक संघ एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ राज्य में पढऩे वाले छात्र छात्राओं के हित में सरकार से इस नियम को शिथिल करते हुए जो पुरानी व्यवस्था है उसे यथावत रखने की मांग करती है। आज से आंदोलन का शुभारंभ किया गया है अगर सरकार छात्र हित में कलस्टर कॉन्सेप्ट को वापस नहीं लेती है तो आगे चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।धरना के दौरान सभी “कलस्टर कॉन्सेप्ट वापस लो – वापस लो, उच्च शिक्षा में नए नए प्रयोग करना बंद करों -बन्द करों, कलस्टर कॉन्सेप्ट एवं हृश्वक्क में विरोधाभासी होगा”आदि नारे लगा रहे थे।
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