रांची 6 मई (आरएनएस)। एक अहम राजनीतिक बयान सामने आया है। झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष सह झारखंड तंजीम के बानी शमशेर आलम ने स्ढ्ढक्र (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को “आवामी तहरीर” बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार सिर के बहाने मुसलमानों को उनके मतदान अधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। अपने जारी बयान में शमशेर आलम ने कहा कि हिंदुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है, जहां हर नागरिक को बराबरी का अधिकार प्राप्त है। लेकिन एक सुनियोजित साजिश के तहत स्ढ्ढक्र के माध्यम से मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान करीब 97 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की बात सामने आई, जिससे इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह पूरे देश में सिर के नाम पर मतदाताओं के नाम हटाने का सिलसिला चल रहा है, जो लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार देते हुए कहा कि इससे समाज के एक बड़े वर्ग को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। शमशेर आलम ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और केंद्रीय एजेंसियां, जो पहले निष्पक्ष मानी जाती थीं, अब एक राजनीतिक दल के “सेल” की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी चिंता जताई।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे स्ढ्ढक्र के पीछे छिपी कथित साजिश को समझें और सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि नागरिक नियमित रूप से अपने नाम की स्थिति वोटर लिस्ट में जांचते रहें और अगर किसी का नाम हटाया गया है तो संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उसे बहाल कराने का प्रयास करें। उन्होंने विशेष रूप से झारखंड के ग्रामीण इलाकों के जागरूक नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे स्ढ्ढक्र को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से न कटे। इसके साथ ही उन्होंने सभी सेक्युलर दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में आपसी मतभेद भुलाकर लोकतंत्र की रक्षा के लिए साझा रणनीति बनाना जरूरी है।
अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में बना रहे और उसके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहे.
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