कवर्धा, 09 मई (आरएनएस)। आज वनमण्डल कार्यालय, कवर्धा के सभाकक्ष में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) टूल्स की उपयोगिता पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण वनमण्डलाधिकारी (ष्ठस्नह्र) निखिल अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में संपन्न हुआ।
कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में रायपुर से पधारे ्रढ्ढ ट्रेनर शिवम बंसल ने उपस्थित जनों को भविष्य की तकनीक और वन विभाग के कार्यों में इसकी महत्ता से अवगत कराया।
अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण सत्र में अभिनव केशरवानी (स्ष्ठह्र कवर्धा), शिवेंद्र भगत (स्ष्ठह्र सहसपुर लोहारा), कीर्तिवर्धन (स्ष्ठह्र पंडरिया), श्रीमती अनीता साहू (अधीक्षक, भोरमदेव अभयारण्य), समस्त परिक्षेत्र अधिकारी, वनमण्डल कवर्धा के लिपिकीय स्टाफ तथा कंप्यूटर ऑपरेटर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में प्रमुख ्रढ्ढ टूल्स और उनकी विशेषताएं
प्रशिक्षण के दौरान शिवम बंसल ने आधुनिक ्रढ्ढ टूल्स का व्यावहारिक प्रदर्शन किया और उनकी निम्नलिखित विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला:
1. (जेमिनी):
विशेषता: यह एक शक्तिशाली बहुभाषी ्रढ्ढ है जो जटिल रिपोर्ट लिखने, डेटा का विश्लेषण करने और विभागीय पत्राचार को सुगम बनाने में सक्षम है।
उपयोगिता: वन विभाग के दैनिक प्रशासनिक कार्यों और ड्राफ्टिंग में यह समय की भारी बचत करता है।
2. (नोटबुक एलएम)
विशेषता: यह गूगल का एक विशेष टूल है जो भारी-भरकम दस्तावेजों और शोध पत्रों को संक्षिप्त करने (स्ह्वद्वद्वड्डह्म्द्ब5द्ग) में माहिर है।
उपयोगिता: वन विभाग के पुराने रिकॉड्र्स, गजट और लंबी विभागीय गाइडलाइंस को पढ़कर उनसे तुरंत सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए यह अत्यंत प्रभावी है।
3.(क्लाउड/ष्टद्यड्डह्वस्रद्ग):
विशेषता: यह अपनी सटीक तर्क क्षमता और मानवीय संवेदनाओं को समझने वाले लेखन के लिए जाना जाता है।
उपयोगिता: जटिल नीतिगत दस्तावेजों के विश्लेषण और रचनात्मक संचार (ष्टशद्वद्वह्वठ्ठद्बष्ड्डह्लद्बशठ्ठ) के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
4. (वनमित्र):
विशेषता: विभागीय कार्यों और मैदानी स्तर पर वन सुरक्षा की निगरानी हेतु विशेषीकृत टूल।
उपयोगिता: यह मैदानी कर्मचारियों को वन अपराधों की रिपोर्टिंग और वृक्षारोपण की ट्रैकिंग में तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
ष्ठस्नह्र निखिल अग्रवाल का संदेश:
प्रशिक्षण के अंत में डी.एफ.ओ. निखिल अग्रवाल ने कहा कि तकनीक को अपनाना आज के समय की मांग है। ्रढ्ढ टूल्स के माध्यम से हम न केवल कार्यक्षमता बढ़ा सकते हैं, बल्कि वन सुरक्षा और वन्यप्राणी प्रबंधन में भी अधिक पारदर्शिता और सटीकता ला सकते हैं। उन्होंने सभी कर्मचारियों को इन तकनीकों को अपने दैनिक कार्यशैली में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।
सभी प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को अत्यंत लाभकारी बताया और भविष्य में भी ऐसे तकनीकी सत्रों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
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