रायगढ़, 09 मई (आरएनएस)। पुलिस कंट्रोल रूम में शनिवार को ऐसा माहौल दिखा, मानो पूरे जिले की कानून व्यवस्था का ब्लूप्रिंट फिर से लिखा जा रहा हो। अपराध, फरार आरोपी, नशे का नेटवर्क, साइबर ठगी, जुआ-सट्टा और सोशल मीडिया पर फैलते अपराध के खिलाफ एसएसपी शशि मोहन सिंह ने पुलिस अफसरों को साफ संदेश दे दिया कि अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना-चौकी प्रभारियों और शाखा प्रमुखों की हाई-वोल्टेज क्राइम मीटिंग में लंबित मामलों पर कड़ा फोकस रहा और “ऑपरेशन तलाश” के तहत फरार आरोपियों को पकडऩे के लिए जरूरत पडऩे पर पुलिस टीमों को दूसरे राज्यों तक भेजने की रणनीति तैयार की गई। बैठक तीन चरणों में चली, जिसमें रायगढ़, धरमजयगढ़ और खरसिया अनुभाग की अलग-अलग समीक्षा हुई और हर थाने की अपराध स्थिति को बारीकी से परखा गया। एसएसपी ने साफ कहा कि गंभीर मामलों की विवेचना में देरी अब सीधे जवाबदेही तय करेगी और सीएसपी-एसडीओपी स्तर तक व्यक्तिगत जिम्मेदारी फिक्स की जाएगी। बैठक में “विजुअल पुलिसिंग” को लेकर भी बड़ा निर्देश जारी हुआ। चौक-चौराहों, बाजारों, ढाबों, सार्वजनिक स्थलों और संवेदनशील इलाकों में लगातार पुलिस की मौजूदगी दिखे, इसके लिए पेट्रोलिंग, फ्लैग मार्च और बीट सिस्टम को और आक्रामक बनाने कहा गया ताकि आम लोगों में भरोसा और बदमाशों में खौफ दोनों कायम रहे। लंबित मर्ग, गुम इंसान और निगरानी बदमाशों की समीक्षा करते हुए सक्रिय अपराधियों को ए, बी और सी कैटेगरी में दोबारा वर्गीकृत करने का निर्देश दिया गया ताकि हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके। “ऑपरेशन आघात” के तहत नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के निर्देश देते हुए एसएसपी ने दो टूक कहा कि ओडिशा से आने वाला गांजा किसी भी हालत में रायगढ़ के थाना क्षेत्रों से पार नहीं होना चाहिए। ढाबों पर अवैध शराब बिक्री रोकने, नियमित चेकिंग करने और थाना प्रभारी का मोबाइल नंबर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कराने के आदेश दिए गए। धर्मकांटा की आड़ में चल रहे संदिग्ध कबाड़ कारोबार पर भी निगरानी बढ़ाने कहा गया। वहीं “ऑपरेशन अंकुश” के तहत ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए गए। साइबर फ्रॉड, महिला सुरक्षा, ट्रैफिक जागरूकता और नशा विरोधी अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए थाना प्रभारियों को एक्टिव कम्युनिटी पुलिसिंग का टास्क सौंपा गया। सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, वीआईपी सुरक्षा और निर्माण कार्यों की प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बेहतर काम करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहन और लापरवाही करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। बैठक के आखिर में एसएसपी शशि मोहन सिंह का संदेश बिल्कुल स्पष्ट था—अपराधियों के लिए अब रायगढ़ में कोई सुरक्षित कोना नहीं बचेगा और लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। बहरहाल, रायगढ़ पुलिस की यह सख्ती आने वाले दिनों में अपराध जगत के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
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