महासमुंद,09 मई (आरएनएस)। में जब्त एलपीजी कैप्सूलों से गैस गायब होने का मामला अब सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि करोड़ों के सुनियोजित सरकारी-प्राइवेट गठजोड़ वाले षड्यंत्र में बदल गया है, जहां जांच में खुद जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया गया है। पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों तक तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर जांच, साइंटिफिक इंटरोगेशन और सूक्ष्म विवेचना के बाद उस साजिश का पर्दाफाश किया जिसमें 6 जब्त गैस कैप्सूलों से करीब 92 टन एलपीजी निकालकर करोड़ों की उगाही की गई। पुलिस के मुताबिक इस पूरे खेल की पटकथा 23 मार्च 2026 को लिखी गई, जब खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर ने कथित रूप से गैस गबन की योजना बनाई। अजय यादव ने डील को अंजाम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पंकज चंद्राकर को दी, जिसने रायपुर निवासी मनीष चौधरी को विभिन्न एजेंसियों से संपर्क करने का काम सौंपा। पुलिस जांच में सामने आया कि 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा थाना पहुंचे और जब्त 6 कैप्सूलों में उपलब्ध गैस का आकलन किया। अनुमान लगाया गया कि कैप्सूलों में करीब 102 से 105 मीट्रिक टन गैस मौजूद है। इसी के बाद एक करोड़ रुपये उगाही की योजना पर मुहर लगी। कई एजेंसियों से बातचीत के बाद ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालक संतोष सिंह ठाकुर के साथ 80 लाख रुपये में फाइनल डील तय हुई। पुलिस के अनुसार इस रकम में सबसे बड़ा हिस्सा 50 लाख रुपये खाद्य अधिकारी अजय यादव के लिए तय हुआ, जबकि पंकज चंद्राकर को 20 लाख और मनीष चौधरी को 10 लाख मिलने थे। जांच में खुलासा हुआ कि सुपुर्दनामा प्रक्रिया के दौरान खाद्य विभाग के कर्मचारियों को दस्तावेजों में हस्ताक्षर न करने के निर्देश दिए गए थे और कैप्सूलों का वजन न करने के भी स्पष्ट आदेश दिए गए ताकि पूरी प्रक्रिया को कागजों में नियंत्रित किया जा सके। पुलिस ने बताया कि 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग के माध्यम से 6 गैस भरे कैप्सूल ट्रकों को ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स ग्राम उरला, अभनपुर रायपुर को सुपुर्द किया गया। इसके बाद एक सप्ताह के भीतर कैप्सूलों से कथित रूप से 92 टन गैस निकाल ली गई। सबसे चौंकाने वाला खुलासा फर्जी वजन पंचनामा को लेकर हुआ। जांच में सामने आया कि कैप्सूलों का वास्तविक वजन होने से पहले ही दस्तावेज तैयार कर कलेक्टोरेट में जमा कर दिए गए थे। पंचनामा खाद्य अधिकारी के कार्यालय में तैयार हुआ और उसी षड्यंत्र में शामिल मनीष चौधरी और पंकज चंद्राकर को स्वतंत्र गवाह बनाया गया। पुलिस के मुताबिक वजन कांटा रजिस्टर के अनुसार एक कैप्सूल का वजन 8 अप्रैल की रात 8 बजे के बाद हुआ, लेकिन संबंधित दस्तावेज दोपहर में ही कलेक्टोरेट पहुंच चुके थे। पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि 30 लाख रुपये नकद मिलने में देरी होने पर संतोष ठाकुर से मनीष चौधरी के अकाउंट में सुरिटी के रूप में रकम ट्रांसफर कराई गई थी, जिसे बाद में वापस लौटा दिया गया। मामले में गिरफ्तार आरोपियों में महासमुंद हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी 35 वर्षीय पंकज चंद्राकर, रायपुर मोवा निवासी 52 वर्षीय मनीष चौधरी और वर्तमान में महासमुंद में पदस्थ 49 वर्षीय खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव शामिल हैं। आरोपियों से मोबाइल फोन, नगदी और लाखों रुपये के होम अप्लायंस सामान समेत कुल 6 लाख 11 हजार 700 रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। पुलिस ने आरोपियों पर धारा 316(3), 316(5), 61, 238, 336(3), 338, 340(2) बीएनएस तथा ईसी एक्ट की धारा 3 और 7 के तहत कार्रवाई की है। यह पूरा मामला सिर्फ गैस गबन नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम, दस्तावेजों और विश्वास की सुनियोजित लूट बनकर सामने आया है। फिलहाल महासमुंद पुलिस इस हाई-प्रोफाइल षड्यंत्र की बाकी कडिय़ों को जोडऩे में जुटी है और यह खुलासा प्रशासनिक तंत्र में बैठे भ्रष्ट गठजोड़ पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
०००
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

