नई दिल्ली 10 May, (Rns): National Union of Seafarers of India (एनयूएसआई) ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच 20 हजार से अधिक भारतीय नाविक फंसे हुए हैं। यूनियन ने आशंका जताई है कि यदि संघर्ष और बढ़ा तो जहाज समुद्र में फंस सकते हैं और चालक दल को भोजन व दवाओं जैसी जरूरी सुविधाओं के बिना मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
एनयूएसआई ने केंद्र सरकार से इस मामले को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते हुए तत्काल निकासी प्रोटोकॉल लागू करने की मांग की है। यूनियन के अनुसार, जहाजों के शेड्यूल, बंदरगाहों पर प्रतिबंध, फ्लैग स्टेट्स और सुरक्षा अलर्ट के चलते इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों की स्थिति लगातार बदल रही है।
खाड़ी क्षेत्र और आसपास काम कर रहे नाविकों को मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे, परिचालन संबंधी पाबंदियों और सुरक्षा चेतावनियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे तकनीकी रूप से खुले होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली सामान्य समुद्री यात्राएं भी बेहद जोखिम भरी बन गई हैं।
एनयूएसआई के जनरल सेक्रेटरी और कोषाध्यक्ष Milind Kandalgaonkar ने शनिवार को कहा कि नाविकों और उनके परिवारों के बीच लगातार चिंता बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यूनियन को परिजनों के लगातार फोन आ रहे हैं, जो अपने परिवार के सदस्यों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंतित हैं।
कंदलगांवकर ने कहा कि कई भारतीय नाविक विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं, जहां उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जहाज मालिकों, बीमा कंपनियों, संबंधित देशों और स्थानीय प्रशासन के बीच बंटी होती है। उन्होंने कहा कि मर्चेंट नेवी के क्रू सदस्य आम नागरिक होते हैं, जो सीमित सुरक्षा के बावजूद वैश्विक व्यापार और भारत की आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।

