भोपाल 10 मई (आरएनएस)। ग्राम झिरी स्थित बेतवा नदी के सूखे उद्गम स्थल को पुनर्जीवित करने और नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए रविवार से पहल शुरू हो गई। यहां पर बड़ी संख्या में भोपाल, इंदौर के रिटायर्ड अफसर और एक्सपर्ट जुटे। बेतवा अध्ययन एवं जनजागरण ग्रुप के बैनरतले पुनर्जीवित करने के लिए मंथन किया।
मप्र-छत्तीसगढ़ के पूर्व आयकर आयुक्त आरके पालीवाल के नेतृत्व में रविवार को बेतवा उद्गम स्थल कोलार डेम के नजदीक बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि भोपाल से कुरवाई तक नदी में स्वच्छ्ता अभियान चलाया जाएगा।
जनभागीदारी से बीते साल 55 चेक डेम बनाए गए थे। इस बार वन समितियां भी जुड़ गई हैं। वहीं, वन विभाग के कई रिटायर्ड अफसर जुड़े हैं। इसलिए उद्गम से ऊपर ओर बीते साल से अधिक चेक डेम बनाए जाएंगे। इस मुहिम में मप्र हाईकोर्ट से जल संरक्षण के लिए नियुक्त एडवोकेट मनीष विजयवर्गीय, डॉ सुरेश गर्ग, कई वन अधिकारी शामिल हुए।
बेतवा नदी में निरंतर बढ़ते प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए “बेतवा अध्ययन एवं जनजागरण समूह ” ने फरवरी मार्च 2023 में बेतवा नदी की अध्ययन एवं जनजागरण यात्रा आयोजित की थी।
सात दिन की उस यात्रा में बेतवा नदी के उद्गम स्थल झिरी ग्राम से कुरवई तक स्थित नदी के किनारे के लगभग दो दर्जन गांवों और आधा दर्जन कस्बों और शहरों के स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थियों, प्रबुद्ध जनों और ग्राम निवासियों से बेतवा की बदतर होती स्थिति पर गंभीर चर्चा और जन-जागरण किया था।
साल 2025 में बेतवा नदी का उद्गम स्थल सूख गया था। नदी के सूखे उद्गम स्थल को जन-सहभागिता से पुनर्जीवित करने के लिए पिछले साल “बेतवा अध्ययन एवं जनजागरण समूह” ने एक सप्ताह के श्रमदान से 55 चैक डैम बनाकर उद्गम स्थल को आंशिक रूप से पुनर्जीवित किया था।
श्रमदान में भोपाल, विदिशा, सीहोर, बैतूल, इंदौर से सैकड़ों प्रकृति प्रेमी शामिल हुए थे। इस साल भी यह समूह 10 से 16 मई तक बेतवा नदी के उद्गम स्थल पर जन सहभागिता से श्रमदान सप्ताह का आयोजन कर रहा है।

