लखनऊ, 11 मई 2026(आरएनएस )। उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक संगीत परंपराओं और विलुप्तप्राय लोक वाद्यों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में “संपदा” कार्यक्रम के अंतर्गत विलुप्त होती अलगोजा वादन परंपरा के अभिलेखीकरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी स्टूडियो, विपिन खंड, गोमती नगर, लखनऊ में संपन्न हुआ।उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य लोक संगीत और पारंपरिक वाद्य परंपराओं का दस्तावेजीकरण कर उन्हें आने वाली पीढिय़ों के लिए संरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में कई पारंपरिक लोक वाद्य विलुप्ति के कगार पर हैं, ऐसे में उनका अभिलेखीकरण और संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है।कार्यक्रम में मथुरा के प्रसिद्ध लोक कलाकार सुखवीर और हरप्रसाद ने अलगोजा एवं चंग वादन की पारंपरिक शैली का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कलाकारों ने अपने वादन के माध्यम से ब्रज क्षेत्र की सांगीतिक विरासत, लोक संवेदनाओं और पारंपरिक धुनों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों, संगीत प्रेमियों और शोधार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस अवसर पर अलगोजा वादन और लोक संगीत परंपरा पर केंद्रित एक विशेष साक्षात्कार सत्र भी आयोजित किया गया। कलाकारों का साक्षात्कार उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर ने लिया। बातचीत के दौरान अलगोजा वादन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसकी तकनीकी विशेषताओं, वर्तमान समय में सामने आ रही चुनौतियों तथा नई पीढ़ी तक इस परंपरा को पहुंचाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम में मौजूद कला प्रेमियों, शोधार्थियों और संगीत अनुरागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि लोक कला और वाद्य परंपराओं के संरक्षण के लिए इस प्रकार के प्रयास समय की जरूरत हैं। उन्होंने इसे सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक प्रेरणादायी और सार्थक कदम बताया।संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, “संपदा” कार्यक्रम के माध्यम से भविष्य में भी प्रदेश की अन्य विलुप्तप्राय लोक कलाओं और वाद्य परंपराओं का अभिलेखीकरण कर उन्हें संरक्षित करने की दिशा में कार्य जारी रहेगा।
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