नई दिल्ली ,13 मई ,। देश के सरकारी बैंकों ने कमाई के मामले में एक ऐसा महा-रिकॉर्ड बना दिया है, जिसे जानकर हर कोई हैरान है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों ने अब तक का सबसे अधिक 1.98 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम शुद्ध लाभ (हृद्गह्ल क्कह्म्शद्घद्बह्ल) दर्ज किया है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों पर अगर गहराई से गौर करें, तो बीते वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों ने हर एक सेकंड में 62 हजार रुपये से ज्यादा का ऐतिहासिक प्रॉफिट कमाया है। यह लगातार चौथा ऐसा साल है जब सरकारी बैंक इतने भारी मुनाफे में रहे हैं और देश की आर्थिक तरक्की में बड़ा योगदान दे रहे हैं।
लोन और जमा राशि में हुआ शानदार इजाफा
इस ऐतिहासिक मुनाफे के पीछे कई बड़े और अहम कारण रहे हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, असेट्स की क्वालिटी में हुआ जबरदस्त सुधार, ऋण (लोन) के स्वस्थ विस्तार और आय में हुई वृद्धि ने सरकारी बैंकों की प्रॉफिटीबिलिटी में सबसे बड़ा योगदान दिया है। इस दौरान बैंकों का कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 31 मार्च, 2026 तक सरकारी बैंकों का कुल कारोबार 12.8 प्रतिशत की शानदार वृद्धि के साथ 283.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा, कुल जमा राशि सालाना आधार पर 10.6 प्रतिशत बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपये रही, जो साफ दर्शाता है कि आम जनता और जमाकर्ताओं का इन बैंकों पर भरोसा लगातार और मजबूत हो रहा है।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार से बढ़ी लोन की डिमांड
देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का सीधा फायदा भी बैंकिंग सेक्टर को मिला है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल ऋण (रुशड्डठ्ठ) वितरण में सालाना आधार पर 15.7 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई और यह आंकड़ा 127 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। मंत्रालय का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न अहम क्षेत्रों में ऋण की निरंतर और मजबूत मांग का स्पष्ट संकेत है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपनी निरंतर व्यापार वृद्धि, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत पूंजी की स्थिति के दम पर यह रिकॉर्ड लाभप्रदता हासिल की है। यह शानदार प्रदर्शन तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की कर्ज संबंधी जरूरतों को पूरा करने में इन बैंकों की क्षमता को सिद्ध करता है।
एनपीए (हृक्क्र) में आई ऐतिहासिक गिरावट, रिकवरी में आई तेजी
मुनाफे के साथ-साथ सरकारी बैंकों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर उनके डूबते कर्ज यानी एनपीए में आई भारी कमी है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बैंकों की एसेट क्वालिटी में अप्रत्याशित सुधार देखने को मिला। 31 मार्च, 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (हृक्क्र) रेश्यो घटकर महज 1.93 प्रतिशत और नेट एनपीए रेश्यो 0.39 फीसदी रह गया, जो स्ट्रेस्ड एसेट्स का ऐतिहासिक रूप से सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा, हर सरकारी बैंक ने 90 फीसदी से ज्यादा का प्रोविजनिंग कवरेज रेश्यो बनाए रखा है। नए स्लिपेज में भी गिरावट जारी रही और यह रेश्यो घटकर 0.7 प्रतिशत रह गया। कुल रिकवरी, जिसमें राइट-ऑफ किए गए खातों से हुई वसूली भी शामिल है, 86,971 करोड़ रुपये रही। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकारी बैंकों का रिकवरी तंत्र और क्रेडिट अनुशासन अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त और प्रभावी हो चुका है।
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