0-लाल किला विस्फोट मामला
नई दिल्ली,14 मई (आरएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए-राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) ने लाल किला इलाके में कार बम विस्फोट मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है. अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी.
पिछले साल 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी को दहला देने वाले इस उच्च तीव्रता के विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी, कई लोग घायल हुए थे और बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.
एनआईए द्वारा जारी बयान के अनुसार, मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी (मृत) समेत सभी 10 आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) का एक सहयोगी संगठन है. आरोपपत्र यहां पटियाला हाउस कोर्ट स्थित एनआईए की विशेष अदालत में दाखिल किया गया.
पटियाला हाउस कोर्ट में स्पेशल एनआईए कोर्ट में फाइल की गई चार्जशीट के मुताबिक, यह साजिश एक्यूआईएस विचारधारा से प्रेरित और अंसार गज़़वत-उल-हिंद (एजीयूएच) के बैनर तले काम कर रहे एक कट्टरपंथी आतंकवादी मॉड्यूल ने रची थी.
जांच के दौरान पता चला कि आरोपियों ने 2022 में तुर्की के रास्ते अफग़ानिस्तान में हिजरत की नाकाम कोशिश के बाद श्रीनगर में एक सीक्रेट मीटिंग के दौरान आतंकवादी संगठन को फिर से जि़ंदा किया था. खुद को एजीयूएच इंटरिम कहने वाले फिर से बने ग्रुप ने कथित तौर पर ऑपरेशन हेवनली हिंद नाम का एक हिंसक कैंपेन शुरू किया, जिसका मकसद लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई भारत सरकार को हटाना और देश में शरिया राज कायम करना था.
गृह मंत्रालय ने जून 2018 में एक्यूआईएस और उससे जुड़े सभी संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया था. एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि एनआईए ने वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के जरिए एक बड़े जिहादी षड्यंत्र का पर्दाफाश किया. जांच में पाया गया कि कुछ कट्टरपंथी बने चिकित्सा पेशेवरों सहित आरोपी एक्यूआईएस/अंसार गजवत-उल-हिंद की विचारधारा से प्रेरित होकर इस घातक हमले को अंजाम देने में शामिल थे.
आरोपपत्र गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967, भारतीय न्याय संहिता, 2023; विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908; शस्त्र अधिनियम, 1959; और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की संबंधित धाराओं के तहत दाखिल किया गया है.
बयान में कहा गया है कि पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी के खिलाफ आरोप समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है, जो आत्मघाती हमले में मारा जा चुका है. वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय में मेडिसिन विभाग का पूर्व सहायक प्रोफेसर था.
एनआईए के अनुसार, इस मामले में नामजद दूसरे आरोपियों में डॉ. नबी के अलावा आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं.
एनआईए ने कहा कि उसकी जांच में एक बड़ी साजिश का पता चला है, जो सीधे एक्यूआईएस की सोच से प्रभावित थी. एक्यूआईएस को जून 2018 में गृह मंत्रालय ने आतंकवादी संगठन घोषित किया था. जांचकर्ताओं के अनुसार, कई आरोपी पढ़े-लिखे प्रोफेशनल थे, जिनमें डॉक्टर भी शामिल थे, जिन्होंने कथित तौर पर कट्टरपंथी प्रोपेगैंडा को अपनाया और अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में मदद के लिए किया.
जांच से पता चला कि मॉड्यूल के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर इलाके में छिपकर काम करते हुए लोगों की भर्ती की, हिंसक कट्टरपंथी सोच का प्रचार किया और हथियार और विस्फोटक जमा किए.
जांच करने वालों ने पाया कि आरोपियों ने चुपके से रासायनिक सामग्री खरीदकर और मिश्रण को परिपूर्ण बनाने के लिए बार-बार प्रयोग करके शक्तिशाली विस्फोटक ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड बनाया था.
एनआईए के मुताबिक, ग्रुप ने ड्रोन-माउंटेड और रॉकेट-असिस्टेड विस्फोटकों सहित अलग-अलग तरह के इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस भी बनाए और टेस्ट किए थे, जिनका कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाने का प्लान था. एजेंसी ने कहा कि आरोपियों ने एके -47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और देसी पिस्तौल जैसे बैन हथियार और जिंदा गोलियां खरीदी थीं.
चार्जशीट को देश भर में हुई जांच के दौरान इक_ा किए गए बड़े सबूतों का समर्थन मिला है. एनआईए ने कहा कि उसने 588 मौखिक गवाही, 395 से ज्यादा डॉक्यूमेंट्री रिकॉर्ड और 200 से ज्यादा जब्त किए गए सामग्री के सबूत इक_ा किए हैं.
जांचकर्ताओं ने वैज्ञानिक और फोरेंसिक विश्लेषण पर भी भरोसा किया, जिसमें डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, वॉयस एनालिसिस और ब्लास्ट साइट और आरोपी से जुड़ी कई जगहों से इक_ा किए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच शामिल है.
चार्जशीट के मुताबिक, डॉक्टर उमर उन नबी की पहचान डीएनए एनालिसिस से हुई, जब जांचकर्ताओं ने ब्लास्ट साइट से बायोलॉजिकल सैंपल बरामद किए. फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर में आरोपी से जुड़ी जगहों से भी सबूत इक_ा किए गए, जहां जांचकर्ताओं ने कहा कि विस्फोटक सामग्री, लैब उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक घटक बरामद किए गए.
एजेंसी ने आगे दावा किया कि आरोपी ने विस्फोटक और वेपन सिस्टम बनाने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन स्रोत से मिक्स्ड मेटल ऑक्साइड एनोड, इलेक्ट्रिक सर्किट और स्विच जैसे खास लैब आइटम खरीदे थे. अधिकारियों ने कहा कि टेरर मॉड्यूल खत्म होने से पहले जम्मू-कश्मीर से बाहर अपना ऑपरेशनल फुटप्रिंट बढ़ाने की कोशिश कर रहा था.
अब तक इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि हृढ्ढ्र ने कहा कि जांच के दौरान जिन फरार लोगों की संलिप्तता सामने आई है, उनका पता लगाने की कोशिश जारी है.
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