0 गांव-गांव संगठन विस्तार का संकल्प
रायपुर,15 मई (आरएनएस)। राजधानी रायपुर के राम जानकी मंदिर, नर्मदा कुंड रेलवे स्टेशन के पास धर्म स्तंभ काउंसिल की रुद्र सेना द्वारा आयोजित विशाल बैठक में प्रदेशभर से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने सनातन धर्म के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और जनजागरण का संकल्प लिया। यह आयोजन उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी बयान के खिलाफ प्रदेशव्यापी सनातन जनजागरण अभियान की शुरुआत के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें कार्यकर्ताओं ने विरोध स्वरूप स्टालिन के चित्र को सड़क पर रखकर जूतों की माला पहनाई और प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया।राजधानी रायपुर सहित दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, बेमेतरा और कोरबा से बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने धर्म रक्षा और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की शपथ ली। कार्यक्रम में डॉ. सौरव निर्वाणी, महंत सुरेंद्र दास सहित कई प्रमुख धर्माचार्यों और पदाधिकारियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने सनातन धर्म की रक्षा के लिए व्यापक जनसंगठन की आवश्यकता पर बल दिया।दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर स्वामी राजीव लोचन दास ने कहा कि सनातन धर्म भारतीय संस्कृति की मूल चेतना है, जिसके विरुद्ध किसी भी प्रकार की टिप्पणी समाज की आस्था को ठेस पहुंचाती है। उन्होंने इस अभियान को धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया।प्रदेश अध्यक्ष आलोक पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि रुद्र सेना अब हर गांव, कस्बे और शहर में अपने संगठन का विस्तार करेगी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के प्रचार और संरक्षण के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं की नई टोली तैयार की जाएगी। साथ ही उन्होंने उदयनिधि स्टालिन के बयान के खिलाफ कानूनी लड़ाई को भी आगे बढ़ाने का ऐलान करते हुए कहा कि संगठन इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी सनातन धर्म पर विवादित टिप्पणी को लेकर न्यायालय स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है और अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।बैठक में उदयनिधि स्टालिन के पुतले को फांसी पर लटकाकर प्रतीकात्मक विरोध की तैयारी की गई। इस दौरान संगठन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें प्रदेशव्यापी जनसभाएं, धर्म यात्राएं और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों को गति देने का निर्णय लिया गया।रायपुर की यह बैठक अब सनातन जनजागरण अभियान की मजबूत शुरुआत के रूप में देखी जा रही है, जहां धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को संगठित रूप देने का संदेश दिया गया। रुद्र सेना ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सनातन मूल्यों की रक्षा और प्रचार के लिए गांव-गांव तक सक्रिय संगठन खड़ा किया जाएगा।
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