महासमुंद,15 मई (आरएनएस)। कार में जबरन ठूंसकर युवक को ओडिशा ले जाया जा रहा था, मोबाइल छीन लिया गया था और रास्तेभर हत्या की धमकी दी जा रही थी, लेकिन सरायपाली पुलिस की ताबड़तोड़ नाकेबंदी ने पूरा खेल बिगाड़ दिया और अपहरणकर्ताओं को रास्ते में ही दबोच लिया। महासमुंद जिले की सरायपाली पुलिस ने उधारी की रकम वसूलने के लिए युवक का अपहरण करने वाले छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घटना 14 मई 2026 की है, जब सरायपाली पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि कार क्रमांक ह्रष्ठ-17-्रत्र-7735 में कुछ लोग हुंडई शोरूम के पास से एक व्यक्ति का अपहरण कर ओडिशा की ओर ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत हरकत में आई और चारों तरफ नाकेबंदी कर दी गई। मुखबिर के बताए अनुसार संदिग्ध कार दिखाई देते ही पुलिस ने उसे रोक लिया। पूछताछ में कार में सवार लोगों ने अपनी पहचान देबार्चन मलिक पिता त्रिनाथ मलिक निवासी दवारी थाना आमाभौना जिला बरगढ़ ओडिशा, राजेश मलिक पिता त्रिनाथ मलिक निवासी दवारी थाना आमाभौना जिला बरगढ़ ओडिशा, रंजन प्रधान निवासी लुकापारा जिला सारंगढ़, भागीरथी बेहरा निवासी भुक्ता थाना आमाभौना जिला बरगढ़ ओडिशा, बंशीधर बंछोर निवासी भुक्ता थाना आमाभौना जिला बरगढ़ ओडिशा और कुनु बाघ निवासी इच्छापुर थाना आमाभौना जिला बरगढ़ ओडिशा के रूप में बताई। कार में मौजूद सरायपाली थाना क्षेत्र के चट्टीगिरोला निवासी 32 वर्षीय निरंजन दास पिता पूर्णचंद दास डरा-सहमा मिला। पुलिस ने उसे आरोपियों के कब्जे से मुक्त कराया। पूछताछ में निरंजन दास ने बताया कि उसने पहले देबार्चन मलिक से 3 लाख 50 हजार रुपये उधार लिए थे, जिसमें से 50 हजार रुपये वापस कर चुका था। बाकी रकम की वसूली के लिए आरोपी अपने पांच साथियों के साथ पहुंचे और उसे जबरन कार में बैठा लिया। आरोपियों ने उसका मोबाइल छीनकर बंद कर दिया और रास्ते में लगातार यह कहते रहे कि आज के बाद तेरा किसी को पता नहीं चलेगा, मर्डर कर देंगे। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और घटना में इस्तेमाल कार क्रमांक ह्रष्ठ-17-्रत्र-7735 को भी जब्त कर लिया। आरोपियों के खिलाफ थाना सरायपाली में अपराध क्रमांक 168/2026 के तहत धारा 296, 351(2), 140(3) और 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस कार्रवाई में त्वरित सूचना प्रसारण, आपसी समन्वय और समय पर की गई नाकेबंदी सबसे बड़ी वजह बनी, जिसके कारण अपहृत युवक को सुरक्षित बचा लिया गया। बहरहाल, महासमुंद पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि कानून हाथ में लेकर उधारी वसूलने वालों के लिए अब रास्ते सीधे जेल तक जाते हैं।
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