चंडीगढ़ 16 may, (Rns)- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि महिलाएं और बच्चे किसी भी समाज एवं देश की नींव होते हैं और इनके सशक्तिकरण के बिना राष्ट्र मजबूत नहीं बन सकता। श्री सैनी ने कहा कि महिलाओं एवं बच्चों को सशक्त करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी आगामी पंचवर्षीय कार्ययोजना इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार करे।
मुख्यमंत्री हरियाणा विजन-2047 के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग की आगामी पंचवर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा समावेशी और न्यायसंगत समाज बनाना है, जहां महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन मिले, वे हिंसा से मुक्त रहें और प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्वस्थ व सहयोगी वातावरण में विकास के पूरे अवसर प्राप्त हों।
सैनी ने निर्देश दिए कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की नियमित निगरानी के लिए विभाग विशेष गतिविधियां शुरू करे। प्रत्येक आयु वर्ग के बच्चों के लिए बेबी शो और स्वास्थ्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं तथा विजेता बच्चों को सम्मानित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में समाज, परिवार और सरकार के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि माताओं में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़े। उन्होंने कहा कि बच्चों के जीवन के पहले छह वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और इन्हीं पर उनके भविष्य की नींव निर्भर करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता के बिना आदर्श परिवार और स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए कि महिलाओं को जागरूक करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जाए। साथ ही प्रत्येक जिले में कामकाजी महिलाओं के लिए वर्किंग वुमन हॉस्टल और उनके बच्चों के लिए क्रेच सेंटर स्थापित किए जाएं। उन्होंने बेटियों की जन्मदर बढ़ाने के लिए प्रदेशभर में विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में लिंगानुपात को राष्ट्रीय औसत 933 से ऊपर ले जाने का लक्ष्य तय कर ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने महिलाओं और बच्चों में एनीमिया जांच का दायरा बढ़ाने, आवश्यक सप्लीमेंट उपलब्ध कराने तथा तीन वर्ष तक के बच्चों और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विशेष पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जिलावार महिला सशक्तिकरण सूचकांक तैयार किया जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन जिलों में महिलाओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विशेष प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त एवं सचिव शेखर विद्यार्थी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 25,962 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को महिलाओं और बच्चों से संबंधित विभिन्न प्रकार का डेटा ऑनलाइन दर्ज करना होता है, इसलिए उनकी दक्षता बढ़ाने और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने के लिए विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

