बागेश्वर,16 मई (आरएनएस)। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में वर्ष 2020 से 2025 तक संस्कृत प्रवक्ता के पद पर अतिथि शिक्षिका के रूप में कार्यरत रहीं तारा कोरंगा न्याय और सम्मान की उम्मीद में अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं। तारा कोरंगा का कहना है कि उन्होंने पांच वर्षों तक विद्यालय में पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ शिक्षण कार्य किया तथा छात्राओं के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अनुसार कुछ आरोपों के चलते उनकी सेवाएं प्रभावित हुईं, जिससे उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से गहरा आघात पहुंचा। उन्होंने बताया कि अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी को तीन माह के भीतर पुनर्विचार कर नियुक्ति पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक उन्हें न्यायपूर्ण निर्णय नहीं मिल सका है। तारा कोरंगा ने कहा कि एक महिला के लिए समाज में सम्मान और आत्मनिर्भरता बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना है कि मुख्य शिक्षा अधिकारी ने न्यायालय के आदेश के बाद पुनर्नियुक्ति का आश्वासन दिया था, लेकिन अंतिम निर्णय का इंतजार अब भी बना हुआ है।
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