नई दिल्ली,28 जून(आरएनएस)। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) राजधानी की बस सेवा को अधिक प्रभावी, सुगम और बेहतर कनेक्टिविटी वाला बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. इसके तहत डीटीसी ‘बस रूट रेशनलाइजेशन स्टडी’ के तहत यात्रियों से फीडबैक एकत्र कर रहा है. इस सर्वे का उद्देश्य यात्रियों की जरूरतों और सुझावों को समझकर दिल्ली के बस नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, रूटों को अधिक व्यवस्थित करना और विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है. डीटीसी का मानना है कि यात्रियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर बस सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और मांग के अनुरूप बनाया जा सकेगा.
राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी व यात्री-केंद्रित बनाने की दिशा में चल रहे बस रूट रेशनलाइजेशन अध्ययन में अब आम लोगों की भी सीधी भागीदारी होगी. दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) द्वारा बस यात्रियों से सुझाव लेने के लिए एक सार्वजनिक सर्वे शुरू किया गया है. इसके लिए डीटीसी ने एक क्यूआर कोड जारी किया है, जिसे स्कैन कर यात्री ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं और बस सेवाओं से जुड़े अपने सुझाव, शिकायतें व अपेक्षाएं दर्ज करा सकते हैं. बता दें कि डीटीसी ने बीते वर्ष दिल्ली के बस नेटवर्क के व्यापक रूट रेशनलाइजेशन अध्ययन को मंजूरी दी थी. यह अध्ययन आईआईटी दिल्ली के टीआरआईपी सेंटर द्वारा बोस्टन कंसल्टेंसी ग्रुप (बीसीजी) और जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) के सहयोग से किया जा रहा है. मार्च 2026 से फरवरी 2027 तक चलने वाले इस अध्ययन का उद्देश्य पूरी दिल्ली में बस नेटवर्क का वैज्ञानिक विश्लेषण कर यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप नए रूट व बेहतर सेवा संरचना तैयार करना है. अब इसी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यात्रियों की राय शामिल की जा रही है.
डीटीसी के सर्वे में यात्रियों से उनकी दैनिक यात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी जा रही है. पूछा जा रहा है कि वे किस बस रूट का सबसे अधिक उपयोग करते हैं, उनकी यात्रा का उद्देश्य क्या होता है, बस सेवा के दौरान उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और वे बस नेटवर्क में किस तरह के बदलाव चाहते हैं. यात्री बसों की उपलब्धता, समयपालन, भीड़, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, बस स्टॉप की सुविधा व नए रूटों की आवश्यकता जैसे विषयों पर भी अपनी राय दर्ज कर सकते हैं. डीटीसी के डिप्टी सीजीएम अमन देव छिकारा का कहना है कि सर्वे के जरिए मिलने वाले सुझावों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन क्षेत्रों में नई बस सेवाओं की जरूरत है, किन रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, कहां बसों की आवृत्ति कम या अधिक की जानी चाहिए और किन इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जा सकती है.
वर्तमान में संचालित लगभग 7 हजार बसों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में चरणबद्ध तरीके से शामिल होने वाली लगभग 7 हजार नई बसों को भी ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी. दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह के मुताबिक आने वाले वर्षों में लगभग 14 हजार बसें दिल्ली की सड़कों पर चलाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके संभावित नेटवर्क के अनुरूप रूटों की योजना बनाई जाएगी, जिससे पूरे शहर में संतुलित व बेहतर बस सेवा उपलब्ध कराई जा सके.
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