गिर सोमनाथ (गुजरात),28 जून(आरएनएस)। आमतौर पर डेढ़ से दो साल के बच्चे बोलना सीखते हैं, लेकिन मूल रूप से जूनागढ़ के और सूरत में रहने वाले कर्ण परमार ने इस उम्र में 170 से अधिक चीजें पहचानकर नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है. डिजिटल स्क्रीन से दूर रहकर फ्लैश कार्ड के जरिए डेवलप की गई शानदार याददाश्त को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स और इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने सम्मानित किया है.
5 जुलाई, 2024 को जन्मे कर्ण परमार ने सिर्फ 1 साल 8 महीने की उम्र में अपनी अनोखी याददाश्त के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (आईबीआर अचीवर) में जगह बनाई. उसके ठीक एक महीने बाद, 1 साल 9 महीने की उम्र में, उसने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सुपर टैलेंटेड किड (वन इन ए मिलियन) का मशहूर टाइटल जीता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना टैलेंट दिखाया है. इस सफलता के लिए उसे मेडल और सर्टिफिकेट दिया गया है.
इतनी कम उम्र में, कर्ण 170 से ज़्यादा चीज़ों को आसानी से पहचान लेता है, जिसमें इंग्लिश अल्फाबेट, फल, सब्जियां, जंगली और पालतू जानवर, पक्षी, गाडिय़ां, अलग-अलग शेप, देशों के झंडे और भी बहुत कुछ शामिल है. वह फ्लैश कार्ड के जरिए हर चीज का नाम सही-सही पहचान लेता है. उसकी इस प्रतिभा की आधिकारिक पुष्टि 14 मार्च, 2026 को हुई.
कर्ण के पिता मिथुनभाई परमार ने कहा, हमने कर्ण को जन्म से ही मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखा है. अभी, वह 170 से ज़्यादा चीज़ों को आसानी से पहचान सकता है. इतनी कम उम्र में उसके टैलेंट को जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है, वह हमारे पूरे परिवार के लिए गर्व और खुशी की बात है.
कर्ण की इस कामयाबी के पीछे उनकी मां नेहालबेन परमार की लगातार मेहनत, सब्र और लगन है. उन्होंने बच्चे को मोबाइल से दूर रखा और किताबों, फ्लैश कार्ड, एजुकेशनल गेम्स और रोजाना पढ़ाई के जरिए उसकी याददाश्त और ज्ञान को बढ़ाया. आज के समय में, जब छोटे बच्चे मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन की तरफ तेजी से आकर्षित होते हैं, कर्ण का उदाहरण माता-पिता को एक सकारात्मक मैसेज देता है कि सही गाइडेंस और क्वालिटी टाइम बच्चे के टैलेंट को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है.
कर्ण के पिता सूरत में बारकोड प्रिंटर का बिजनेस चलाते हैं. परिवार असल में जूनागढ़ जिले के अंबालियाला गांव का रहने वाला है, जबकि कर्ण का होमटाउन अमरेली जिले के केरियाचड गांव में है. कर्ण की इस दोहरी कामयाबी से सूरत, जूनागढ़, अमरेली और पूरे गुजरात, बाबर कम्युनिटी को गर्व है.
नन्हे कर्ण ने अपने जबरदस्त टैलेंट से यह साबित कर दिया है कि टैलेंट के लिए उम्र कभी रुकावट नहीं बनती. आज हर कोई उसके अच्छे भविष्य की कामना कर रहा है और उम्मीद कर रहा है कि कर्ण भविष्य में अपनी कामयाबियों से दुनिया भर में भारत का नाम और रोशन करेगा.
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