अजय दीक्षित
भगवान बुद्ध का संदेश आज की दुनिया में कितना प्रासंगिक है। इस बात इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ईसाई, मुस्लिम धर्म के बाद सबसे अधिक अनुयायि बौद्ध धर्म के है।
जिसमें चाइना, जापान, इंडोनेशिया, मलेशिया, ताई वान, आदि देश शामिल है। भगवान गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी नेपाल में 563 बी सी को शाक्य कुल में राजा शुद्धोधन के वहां हुआ था। उनकी मृत्यु कुशीनगर (भारत) में 80 वर्ष की आयु में हुई थी।। भगवान गौतम बुद्ध का बचपन का नाम सिद्धार्थ था।जब वे 17 वर्ष के थे तो उनका विवाह राजकुमारी अंग राज्य यशोधरा से हो गया था। लेकिन राजकुमार सिद्धार्थ का मन राजकाज में नहीं लगता था। ये देखकर शुद्धोधन परेशान थे।वे अक्सर राजप्रासाद से निकलकर जंगल में रहते थे।एक दिन उन्होंने देखा कि कुछ लोग एक बूढ़े बीमार आदमी को ले जा रहे थे। कुछ दिन बाद उन्होंने एक अर्थी देखी तो पूछा इसे कहां ले जा रहे हो वे पीछे पीछे गए। अर्थी जब जलाया गया तो उनका मान सासारिक विरक्ति में चला गया। बाद उन्हें एक पेड़ के नीचे बैठ कर सच्चे ज्ञान की उपलब्धि हुईं। बुद्ध ने ईसा से पूर्व 500वर्ष पहले शांति का पाठ पढ़ाया उनकी मृत्यु कुशीनगर अस्सी साल की आयु में हुई।
उन्होंने कलिंग से निकलकर पूरे जम्बूद्वीप का दौरा किया। आज जिसे इंडोनेशिया, मलेशिया, ताई, वान, चियान,में कई मठ, अंग्लई, स्थापित किए। तिब्बत में वे काफी समय रहे।
पूरी दुनिया को तत्कालीन समय में शांति का पाठ पढ़ाने वाले भगवान गौतम बुद्ध ने कहा था कि शांति और अहिंसा ही मानव जीवन का कल्याण कर सकती है। भगवान् बुद्ध ने कहा है कि युद्ध किसी भी सूरत में उचित नहीं होता है। कलिंग युद्ध में जीतने के बाद सम्राट अशोक ने अपने सेनापति के साथ युद्ध भूमि का दौरा किया था और देखा कि लाखों सैनिक मरे हुए पड़े हैं किसी धड से सिर अलग पड़ा है। हजारों सैनिक गम्भीर रूप घायल है और बेबस पड़े हैं इन सैनिकों में उनके भी है। यह दृश्य देखकर वे अपने आप में घृणा से भर गए ,मन ही मन सोच रहे थे कि इस युद्ध से मुझे क्या मिला और उन्होंने अपना मुकुट उतारकर रथ से फेंक दिया।यह सब सेनापति चार्वाक भी देख रहा था वह रोने लगता है क्योंकि उसका पुत्र भी मारा गया था।
सम्राट अशोक ने राजमहल में जा कर राजप्रासाद पर सिर फोड़ा और वे पश्चाताप ब ग्लानि से भर गए।उनका शरीर कंपन कर रहा था।वे जंगल की तरफ भागे और भागते गए ,उनकी सांस फूल रही थी लेकिन मन कह रहा था कि राजन तुम भीषण दोषी हो। भागकर एकदम से बुद्ध की एंग्लोई के आगे गिर पड़े । बुद्ध शांत मुद्रा में थे , ध्यान में उनका मन आवाज सुनकर एकदम से हरकत में आया तो पाया कि सम्राट अशोक पड़े हैं। उनके सेवक यशुदास ने कलिंग सम्राट को खड़ा किया तो उनका शरीर बुरी तरह कंपन कर रहा था।
सम्राट अशोक रो रहे थे। बुद्ध समझ गए। उन्होंने कलिंग सम्राट को पानी पिलाया और सुबह मिलने बात कह कर ध्यान में लग गए। सम्राट अशोक रात भर रोते रहे सुबह उन्होंने बुद्ध से संन्यास ले कर जीवन व्यतीत कर ने बात कही और इस तरह एक शक्ति का पराभव हुआ । लेकिन वे सम्राट अशोक थे जो धर्म पर चलने वाले राजा थे शुद्धोधन के पुत्र थे।इस लिए उन्होंने अपनी जिम्मेदारी ली। युद्धों के इतिहास में राम रावण युद्ध भी था जिसमें रावण ने सीता का हरण किया था। लेकिन वह राम से लड़कर बीर गति प्राप्त करना चाहता था जबकि उसे मालूम था कि वह जीतेगा नहीं लेकिन राम ने जब मर्यादा पुरुषोत्तम का पाठ पढ़ाया था।एक युद्ध महाभारत का द्वापर में हुआ जो अन्याय के खिलाफ लड़ा गया जिसका उद्देश्य भगवान श्री कृष्ण ने गीता के माध्यम से दिया। भगवान गौतम बुद्ध ने पूरे संसार को शांति का पाठ दिया। लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में ईरान अमेरिका युद्ध क्रूड ऑयल, गैस, टैंकरों, हॉर्मूज समुद्री क्षेत्र के लिए लड़ा जा रहा है। मुस्लिम कुरान में हजरत पैगंबर मोहम्मद साहब और ईसा माशीह ने बाइबल में शांति का संदेश ही दिया है। मगर ईरान के मौजसफा खमनोई, और यूएस प्रेसिडेंट डॉनल्ड ट्रंप अपने पैगंबर को नहीं मानते हैं यद्यपि ईसाई धर्म प्रमुख पॉप लियो ने भी यही कहा कि युद्ध में बच्चे मारे जा रहे हैं और धर्म आधारित नहीं है यह युद्ध।पॉप लियो ने कहा कि अमेरिका के लोगों को प्रतिनिधित्व पर दबाब डालना चाहिए क्योंकि यह ईरान अमेरिका युद्ध मानवता के खिलाफ है। विश्व में हुती, हिजबुल्लाह,हमास, अलकायदा,जेश ए तोयबा, मुजाहिद्दीन,लश्कर ए तोयबा,
बलूचिस्तान आर्मी, ऐसे संगठन है जो किसी न किसी देश द्वारा प्रॉक्सी ग्रुप है।गाजा में इसराइल ने 3 वर्ष में दो लाख बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। इसराइल 17 वर्ष से फिलिस्तीन में हमला जमीन पर कब्जा कर रहा है। और यह सब अमेरिका की शह पर हो रहा है। अमेरिका बेतहाशा हथियारों को बनाने वाला देश है। इसराइल को अमेरिका ने 20 वर्ष से मिसाइल, लड़ाकू विमानों का जखीरा उपलब्ध करवाया है।
भगवान गौतम बुद्ध का संदेश 2500 वर्ष बाद लगभग अप्रासंगिक हो गया है क्योंकि समाज में हिंसा, अशांति का माहौल है। लेकिन भगवान् बुद्ध का संदेश हमेशा प्रासंगिक ही रहेगा।
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