नई दिल्ली,19 मई (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड महामारी के दौरान स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किए गए उन चार अलग-अलग मामलों को मंगलवार को बंद कर दिया, जिनमें अस्पतालों में मरीजों के इलाज और शव के उचित प्रबंधन से जुड़े मामले शामिल थे.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की बेंच ने पाया कि महामारी के समय स्थितियां अलग थीं और शीर्ष अदालत ने इन मुद्दों का संज्ञान लेकर नागरिकों की चिंताओं को कम करने के लिए कई निर्देश पारित किए थे.
बेंच स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई चार याचिकाओं पर विचार कर रही थी, जो महामारी के दौरान मध्याह्न भोजन योजना को बंद करने, वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालती कामकाज के दिशा-निर्देशों, कोविड-19 मरीजों के उचित इलाज, अस्पतालों में शव के उचित प्रबंधन और आवश्यक वस्तुओं तथा सेवाओं के वितरण से संबंधित थीं.
एक मामले में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि उस समय सुप्रीम कोर्ट के विचारार्थ जो मुद्दे उठे थे, वे अब निरर्थक हो चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महामारी के दौरान आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के वितरण सहित विभिन्न मुद्दे उसके समक्ष आए थे.
बेंच ने कहा कि उन मुद्दों को सुप्रीम कोर्ट ने प्रभावी ढंग से निपटाया था, जिसने कई आदेश और निर्देश पारित किए थे. इन याचिकाओं का निपटारा करते हुए पीठ ने कहा कि ये मुद्दे अब निरर्थक हो चुके हैं. बेंच ने इस बात का भी उल्लेख किया कि विभिन्न व्यक्तियों की ओर से अपनी शिकायतें दर्ज कराते हुए कई अन्य अलग याचिकाएं भी दायर की गई थीं.
बेंच ने कहा कि अगर कोई शिकायत बची हो, तो याचिकाकर्ता उचित मंच के समक्ष उठा सकते हैं. बेंच ने कहा कि उस पृथक याचिका पर अगस्त में सुनवाई की जाएगी, जिसमें गुजरात के एक अस्पताल में आग लगने की घटना का मुद्दा उठाया गया था. इस घटना में कुछ कोविड मरीजों की मौत हो गई थी.
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