हाईकोर्ट के संज्ञान लेते ही बीएसए का आदेश वापस
सुलतानपुर 20 मई (आरएनएस )। बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेन्द्र गुप्ता द्वारा प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाए गए शिक्षकों के आदेश को हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद आनन-फानन में प्रत्यावर्तित करना पड़ा।
इस पूरे मामले ने विभागीय पारदर्शिता और वरिष्ठता नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष रणवीर सिंह, पूर्व जिला प्रवक्ता राहुल राष्ट्रवादी समेत कई शिक्षकों ने आदेश वापसी का स्वागत करते हुए कहा कि प्रभारी प्रधानाध्यापक की नियुक्ति पूरी तरह वरिष्ठता सूची के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि बीएसए सार्वजनिक रूप से वरिष्ठता सूची जारी करें और निष्पक्ष तैनाती सुनिश्चित करें। सूत्रों के हवाले से बड़ा आरोप है कि बीएसए के करीबी बताए जा रहे पंकज सिंह को वरिष्ठता सूची दरकिनार कर प्रभारी प्रधानाध्यापक बना दिया गया। जिस विद्यालय में उन्हें चार्ज दिया गया, वहां उनसे वरिष्ठ शिक्षक मौजूद थे और कुछ शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में केवल दो वर्ष ही शेष बताए जा रहे थे। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस दबाव और किस नियम के तहत वरिष्ठ शिक्षकों को नजरअंदाज कर यह तैनाती की गई? अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद विभाग बैकफुट पर नजर आ रहा है। शिक्षा विभाग की कार्यशैली को लेकर जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है। शिक्षकों का कहना है कि यदि नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों तेज हो सकती हैं।
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