आजमगढ़, 12 जुलाई(आर एन एस) जनपद आजमगढ़ में संगठित अपराध, भूमाफियाओं और गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रविवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासन और पुलिस ने कुख्यात अपराधी, गैंगस्टर एवं भूमाफिया कृष्णचन्द्र राय उर्फ के.सी. राय की लगभग 10 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्ति को न्यायालय के आदेश पर कुर्क कर प्रशासनिक कब्जे में ले लिया। डुगडुगी पिटवाकर नियमानुसार की गई इस कार्रवाई को जिले में अपराधियों के विरुद्ध आर्थिक प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।पुलिस के अनुसार कृष्णचन्द्र राय उर्फ के.सी. राय वर्तमान में जेल में निरुद्ध है तथा उसे पूर्व में प्रशासनिक आधार पर अम्बेडकरनगर कारागार स्थानांतरित किया जा चुका है। पुलिस का आरोप है कि अभियुक्त ने वर्षों तक फर्जी खतौनी, जमीन के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी, गैंगस्टर गतिविधियों तथा अन्य संगठित अपराधों के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित कर अपना आर्थिक साम्राज्य खड़ा किया। इसी अवैध कमाई से उसने ग्राम कोडर अजमतपुर में विशाल भवन का निर्माण कराया और धीरे-धीरे आसपास की जमीन खरीदकर तथा कब्जे में लेकर अपने साम्राज्य का विस्तार करता रहा।
न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुपालन में की गई। न्यायालय ने धारा 107 बीएनएसएस के अंतर्गत संपत्ति को कुर्क करने का आदेश पारित करते हुए तहसीलदार को उसका प्रशासक नियुक्त किया। आदेश के अनुपालन में रविवार को पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर डुगडुगी पिटवाकर पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की और भवन सहित पूरी संपत्ति को प्रशासनिक कब्जे में ले लिया।कार्रवाई के दौरान पूरे परिसर को सील करते हुए स्पष्ट किया गया कि अब यह संपत्ति प्रशासन के नियंत्रण में रहेगी और बिना सक्षम अनुमति के किसी भी प्रकार का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
2012 से शुरू हुआ था कथित अवैध साम्राज्य
पुलिस विवेचना के अनुसार कृष्णचन्द्र राय ने वर्ष 2012 से अपराध से अर्जित धन के बल पर भूमि खरीदने का सिलसिला शुरू किया। प्रारंभ में सीमित क्षेत्रफल में जमीन खरीदने के बाद उसने धीरे-धीरे आसपास की अन्य भूमि भी अपने कब्जे में लेकर अपने परिसर का विस्तार किया।इसी दौरान वहां एक बहुमंजिला गगनचुंबी इमारत का निर्माण कराया गया। बाद के वर्षों में भवन का कई बार पुनर्निर्माण, मरम्मत और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का कार्य भी कराया गया। पुलिस का कहना है कि निर्माण और रिनोवेशन पर खर्च की गई धनराशि का कोई वैध स्रोत सामने नहीं आया।विवेचना में यह भी आरोप लगाया गया कि भवन का उपयोग केवल आवासीय परिसर के रूप में नहीं बल्कि गैंग के सदस्यों के जमावड़े, बैठकों तथा विभिन्न आपराधिक गतिविधियों की योजना बनाने के लिए भी किया जाता था।
जांच में सामने आए कई महत्वपूर्ण तथ्य
थाना कोतवाली में पंजीकृत मुकदमा संख्या 92/2026 की विवेचना के दौरान पुलिस को ऐसे अनेक तथ्य मिले जिनके आधार पर संपत्ति को अपराध से अर्जित धन से निर्मित माना गया।पुलिस के अनुसार अभियुक्त के विरुद्ध दर्ज मुकदमे में आपराधिक न्यासभंग, छल, कपट, कूटरचना, फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से जमीन की खरीद-फरोख्त, गैंगस्टर गतिविधियां तथा संगठित अपराध जैसे गंभीर आरोपों की जांच की जा रही थी।विवेचना के दौरान यह भी सामने आया कि अभियुक्त के पास भवन निर्माण अथवा बैंक ऋण की किश्तों का भुगतान करने के लिए कोई वैध आय का स्रोत उपलब्ध नहीं था। जांच एजेंसियों ने उसकी आय, संपत्ति और खर्च का तुलनात्मक अध्ययन किया, जिसमें कथित रूप से आय और निवेश के बीच भारी असमानता पाई गई।
पांच गाटा संख्या में फैला है पूरा परिसर
पुलिस के अनुसार वर्तमान में अभियुक्त का कथित अपराध साम्राज्य लगभग पांच गाटा संख्या में फैला हुआ है। इस पूरे परिसर में निर्मित भवन, भूमि तथा अन्य अचल परिसंपत्तियां शामिल हैं।राजस्व विभाग ने भूमि का सीमांकन और मूल्यांकन किया, जबकि लोक निर्माण विभाग ने भवन का तकनीकी निरीक्षण कर उसकी अनुमानित कीमत निर्धारित की। दोनों विभागों की रिपोर्ट के आधार पर पूरी संपत्ति का बाजार मूल्य लगभग 10 करोड़ रुपये आंका गया।इसी मूल्यांकन रिपोर्ट को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर कुर्की की कार्रवाई का आदेश जारी किया गया।
पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक नगर मधुवन कुमार सिंह के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी नगर शुभम तोदी की उपस्थिति में यह कार्रवाई संपन्न कराई गई।कार्रवाई का नेतृत्व विवेचक निरीक्षक रफी आलम ने किया। पुलिस बल और राजस्व विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर भवन की विधिवत कुर्की की प्रक्रिया पूरी की।स्थानीय लोगों की मौजूदगी में डुगडुगी पिटवाकर सार्वजनिक घोषणा की गई कि न्यायालय के आदेश के अनुसार उक्त संपत्ति अब प्रशासनिक कब्जे में है।
गैंगस्टर के खिलाफ पहले से दर्ज हैं अनेक मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार कृष्णचन्द्र राय उर्फ के.सी. राय के विरुद्ध विभिन्न थानों में कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, आपराधिक विश्वासघात, अपहरण, मारपीट, रंगदारी, धमकी, षड्यंत्र, गैंगस्टर एक्ट तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों सहित अनेक गंभीर आरोप शामिल हैं।वर्ष 2011 से लेकर 2026 तक उसके विरुद्ध विभिन्न थानों—कप्तानगंज, कोतवाली, कंधरापुर, बरदह, सिधारी, जीयनपुर और बिलरियागंज—में कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन मामलों के आधार पर अभियुक्त को हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया और उसके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत भी कार्रवाई की गई।
आर्थिक कार्रवाई पर प्रशासन का विशेष जोर
हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश में अपराधियों के विरुद्ध केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर उनकी आर्थिक संपत्तियों पर भी कार्रवाई करने की नीति अपनाई गई है। इसी क्रम में आजमगढ़ पुलिस अपराध से अर्जित संपत्ति की पहचान कर उसे जब्त अथवा कुर्क कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रही है।पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अपराधियों के आर्थिक संसाधनों को समाप्त किए बिना संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। इसी सोच के तहत ऐसे मामलों में न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है।
विवेचना बनी कार्रवाई का आधार
पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में विवेचक निरीक्षक रफी आलम द्वारा की गई विस्तृत और तथ्यपरक विवेचना महत्वपूर्ण साबित हुई। जांच के दौरान भूमि खरीद, भवन निर्माण, बैंकिंग लेनदेन, आय के स्रोत तथा संपत्ति विस्तार से जुड़े विभिन्न दस्तावेज एकत्र किए गए।इन्हीं तथ्यों के आधार पर न्यायालय में यह पक्ष रखा गया कि अभियुक्त ने कथित रूप से अपराध से अर्जित धन के माध्यम से संपत्ति बनाई और उसका विस्तार किया। न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कुर्की का आदेश पारित किया गया।
पुलिस का संदेश
आजमगढ़ पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में संगठित अपराध, गैंगस्टरों, भूमाफियाओं और अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस का कहना है कि अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त एवं कुर्क कर अपराधियों की आर्थिक रीढ़ तोडऩा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।पुलिस ने यह भी कहा कि “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत भविष्य में भी ऐसे अपराधियों के विरुद्ध कठोर, प्रभावी और विधिसम्मत कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी ताकि संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
जिले में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
करीब 10 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति की कुर्की जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई केवल किसी व्यक्ति के विरुद्ध दंडात्मक कदम नहीं बल्कि यह संदेश भी है कि यदि कोई व्यक्ति अपराध के माध्यम से अवैध संपत्ति अर्जित करेगा तो कानून उसकी पूरी आर्थिक व्यवस्था पर भी प्रहार करेगा।रविवार को की गई इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की।पुलिस का मानना है कि इस तरह की आर्थिक कार्रवाई न केवल अपराधियों के मनोबल को तोड़ती है बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास भी मजबूत करती है। आने वाले समय में भी अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध इसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

