सुलतानपुर 20 मई (आरएनएस)। लखनऊ खंडपीठ ने ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज, सुलतानपुर के प्राचार्य को एक स्टाफ नर्स द्वारा प्रस्तुत प्रत्यावेदन पर निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति की एकल पीठ द्वारा पारित किया गया।
मामला रिट-ए संख्या 3705/2026 से संबंधित है, जिसे कीर्ति श्रीवास्तव ने अधिवक्ता अजय बहादुर के माध्यम से दाखिल किया था। याचिका में मांग की गई थी कि याचिकाकर्ता को स्टाफ नर्स के पद पर कार्य करने दिया जाए तथा उनके कार्य में किसी प्रकार की बाधा या उत्पीडऩ न किया जाए। इसके अतिरिक्त, 19 फरवरी 2026 को प्राचार्य के समक्ष प्रस्तुत उनके प्रत्यावेदन के निस्तारण की भी मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि शिकायत दर्ज होने के बाद उन्हें सेवा से हटा दिया गया, जिसके कारण उनके प्रत्यावेदन पर शीघ्र निर्णय आवश्यक है। बाद में याचिकाकर्ता की ओर से राहत की मांग को केवल प्रत्यावेदन के निस्तारण तक सीमित कर दिया गया। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने भी प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के लिए न्यायालय द्वारा निर्देश जारी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि प्राचार्य ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज, सुलतानपुर, याचिकाकर्ता के 19 फरवरी 2026 के प्रत्यावेदन पर विचार करते हुए आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से दो माह के भीतर कारणयुक्त एवं स्पष्ट आदेश पारित करें।
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