धमतरी 20 मई (आरएनएस) जहां पुलिस की पहचान सिर्फ वर्दी और कानून तक सीमित मानी जाती है, वहीं धमतरी पुलिस ने फिटनेस, अनुशासन और मानसिक मजबूती की ऐसी मिसाल पेश की कि राजभवन तक उसकी गूंज पहुंच गई। धमतरी पुलिस की “पुलिस की पाठशाला” को उस वक्त बड़ी उपलब्धि मिली जब पुलिस लाइन रुद्री में योग प्रशिक्षण देने वाले आरक्षक सुजय मंडल और उनकी शिष्या रूची साहू को राजभवन स्थित छत्तीसगढ़ मड़पम में आयोजित सम्मान समारोह में महामहिम राज्यपाल रमन डेका ने नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। यह सम्मान केवल दो लोगों की उपलब्धि नहीं बल्कि धमतरी पुलिस के उस प्रयास की पहचान बन गया, जिसमें पुलिस जवानों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए योग को हथियार बनाया गया है। पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार के मार्गदर्शन में संचालित “पुलिस की पाठशाला” लगातार नवाचार कर रही है और इसी पहल के तहत आरक्षक सुजय मंडल पुलिस जवानों को कठिन योग आसनों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। मयूरासन, शीर्षासन, चक्रासन, धनुरासन
और हलासन जैसे चुनौतीपूर्ण योग आसनों में निपुण सुजय मंडल लंबे समय से पुलिस लाइन रुद्री में योग शिविर आयोजित कर अधिकारी और कर्मचारियों को फिटनेस, मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके प्रशिक्षण का असर अब पुलिस जवानों की कार्यक्षमता और अनुशासन में साफ दिखाई देने लगा है। खास बात यह रही कि उनकी शिष्या रूची साहू को भी राज्यपाल के हाथों सम्मान मिला। रूची साहू ने योग की बारीकियां और कठिन आसनों का विशेष प्रशिक्षण अपने गुरु सुजय मंडल से प्राप्त किया है और अब वे खुद भी योग प्रशिक्षण गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाकर पुलिस जवानों को फिट रहने के लिए प्रेरित कर रही हैं। सम्मान प्राप्त करने के बाद आरक्षक सुजय मंडल और रूची साहू ने पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार से मुलाकात कर उनका आभार जताया। इस दौरान एसपी ने दोनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पुलिस विभाग में कार्यरत जवानों का मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत रहना बेहद जरूरी है और योग इसके लिए सबसे प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है। उन्होंने योग प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान को लगातार जारी रखने की बात कही। इस उपलब्धि के बाद कलेक्टर धमतरी, पुलिस अधीक्षक सहित जिले के तमाम पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने आरक्षक सुजय मंडल और रूची साहू को बधाई दी। बहरहाल, धमतरी पुलिस की यह पहल अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि फिट और मानसिक रूप से मजबूत पुलिस बल तैयार करने की एक प्रेरणादायक मुहिम बन चुकी है।


