बीजापुर, 20 मई (आरएनएस)। बीजापुर जिले में माओवाद की वजह से 4 दशक तक यहां न कोई प्रशासनिक अमला और पूर्व में न हीं जनगणना का कार्य हो पाया था। 2011में यहां पर माओवाद की काली साये की वजह से जनगणना का कार्य से अछुता रहा। लेकिन 4 दशक के बाद नक्सल प्रभाव और भय के साये में जीने वाला दारेली गांव अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।
ग्रामीणों के लिए यह केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि मुख्यधारा से जुडऩे की नई शुरुआत साबित हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाएं अब उन गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां कभी लाल आतंक के कारण विकास की कल्पना भी मुश्किल थी। इसी कड़ी में कलेक्टर विश्वदीप और जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे, जनगणना प्रभारी अधिकारी मुकेश देवांगन, उसूर एसडीएम भूपेन्द्र गावरे ने दारेली गांव का दौरा कर ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। गांव पहुंचते ही प्रशासनिक अधिकारियों का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। वर्षों से अपनी बात शासन तक नहीं पहुंचा पाने वाले ग्रामीणों ने पहली बार महसूस किया कि सरकार उनके द्वार तक आई है। इस दौरान गांव में जनगणना का कार्य भी कराया गया, जो दारेली के इतिहास में पहली बार हुआ। ग्रामीणों ने इसे गांव के लिए सुखद पल बताया।
कलेक्टर विश्वदीप ने ग्रामीणों से चर्चा कर जमीन के पट्टा, आधार कार्ड, बैंक खाते, राशन कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी ली। कई लोगों के दस्तावेज अधूरे पाए जाने पर उन्होंने अधिकारियों को गांव में विशेष शिविर लगाकर सभी का शत-प्रतिशत सैचुरेशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
दौरे के दौरान एक भावुक क्षण तब सामने आया, जब एक किसान ने बताया कि पिता के निधन के बाद भी उसकी जमीन का नामांतरण अब तक नहीं हो पाया है। किसान की पीड़ा सुन कलेक्टर विश्वदीप ने तत्काल अधिकारियों को नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए और इसकी जानकारी स्वयं लेने की बात कही। प्रशासन की संवेदनशीलता देखकर किसान भावुक हो उठा और उसने हाथ जोड़कर कलेक्टर को धन्यवाद दिया। कलेक्टर विश्वदीप ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। साथ ही ग्राम पंचायत दारेली के सभी बच्चों को छात्रवृत्ति दिलाने के निर्देश भी दिए गए। एक समय भय और उपेक्षा का प्रतीक रहा दारेली गांव अब विकास, विश्वास और नई उम्मीद की राह पर आगे बढ़ रहा है। प्रशासन की यह पहल ग्रामीणों के दिलों में भरोसे की नई रोशनी जगा रही है।
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