जशपुर 21 मई (आरएनएस) सुबह के अंधेरे में जंगल के रास्ते गौवंशों को पीटते हुए झारखंड ले जा रहे तस्करों की पूरी साजिश उस वक्त ध्वस्त हो गई जब जशपुर पुलिस ने “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत घेराबंदी कर 7 गौवंशों को तस्करों के चंगुल से सकुशल छुड़ा लिया। पुलिस को देखते ही तस्कर जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए, लेकिन पुलिस ने मौके से सभी गौवंशों को सुरक्षित बरामद कर लिया। मामला जशपुर जिले के मनोरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम डहुकोना का है, जहां 20 मई 2026 की सुबह करीब 4:30 बजे चौकी लोदाम पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि कुछ तस्कर जंगल के रास्ते 7 नग गौवंशों को बेरहमी से मारते-पीटते हुए पैदल झारखंड की ओर ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही चौकी मनोरा पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया और तत्काल टीम के साथ ग्राम डहुकोना के जंगल की ओर रवाना हुई। जंगल में पुलिस ने देखा कि दो संदिग्ध व्यक्ति तेजी से गौवंशों को हांकते हुए आगे बढ़ रहे हैं। पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की, लेकिन खुद को घिरता देख तस्कर गौवंशों को छोड़कर घने जंगल में फरार हो गए। पुलिस ने मौके से 7 नग गौवंशों को सकुशल बरामद किया और उनका पशु चिकित्सक से स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया। मामले में चौकी मनोरा में छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6, 10 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1961 की धारा 11(1)(क)(घ) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। फरार गौ तस्करों की तलाश लगातार जारी है और पुलिस का दावा है कि उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस पूरी कार्रवाई में चौकी प्रभारी मनोरा सहायक उप निरीक्षक शांति प्रमोद टोप्पो, प्रधान आरक्षक वितीन भगत, आरक्षक शैलेन्द्र तोमर, रविन्द्र पैंकरा और जगजीवन राम यादव की अहम भूमिका रही। जशपुर के डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह ने साफ कहा है कि गौ तस्करी में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और “ऑपरेशन शंखनाद” लगातार जारी रहेगा। फिलहाल, जंगल के रास्ते चल रही गौ तस्करी पर जशपुर पुलिस का यह बड़ा वार इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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