०परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में सभी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के दिए निर्देश
०जशपुर बनेगा आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का राष्ट्रीय मॉडल जिला
जशपुरनगर,21मई (आरएनएस)। कलेक्टर रोहित व्यास ने आज कांसाबेल विकासखंड के ग्राम बगिया में संचालित समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। वर्तमान में परियोजना के प्रारंभिक चरण में ले-आउट एवं खुदाई कार्य प्रगति पर है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना मैनी नदी पर निर्मित बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से संचालित की जा रही है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि आधुनिक एवं नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर इस सिंचाई परियोजना का निर्माण किया जा रहा है, जो भविष्य में एक आदर्श सिंचाई मॉडल के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में सभी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।आधुनिक
तकनीक, सौर ऊर्जा और स्मार्ट जल प्रबंधन से किसानों को मिलेगा लाभपरियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके तहत जमीन के अंदर पाइप बिछेगी, जिससे जमीन अधिग्रहण की भी समस्या नहीं होगी। पहले सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता था। अब इस योजना से पानी की कमी दूर होगी। साथ ही किसानों को पर्याप्त पानी भी मिलेगा। देश में 23 राज्यों में 34 योजना स्वीकृत किए गए है। इसमें प्रदेश का एकमात्र बगिया क्लस्टर शामिल है। जिसके लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपए है। इसके अंतर्गत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 ग्रामों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, पानी की हर बूंद का समुचित उपयोग करते हुए कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है। परियोजना में विद्युत आपूर्ति सौर ऊर्जा के माध्यम से की जाएगी। साथ ही जल के नियंत्रित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजि़शन तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से सिंचाई परिसंपत्तियों पाइप नेटवर्क संरचना एवं जल प्रबंधन के संचालन में किसानों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। डेटा एवं विश्लेषण के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि कहां, कब और कितना पानी देना है। बेहतर सिंचाई व्यवस्था के साथ उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जा रहा है, जिससे दीर्घकालीन उत्पादकता, लाभप्रदता और किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार सुनिश्चित होगा।
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