नईदिल्ली,23 मई (आरएनएस)। भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी जीत मिली है। वह 30 और 31 मई को होने वाले एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा ले सकती हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की चयन नीति स्पष्ट रूप से असमानता पैदा करने वाली है। कोर्ट ने ये भी कहा कि मातृत्व अवकाश के कारण ब्रेक लेने वाली विनेश जैसी खिलाडिय़ों को डब्ल्यूएफआई किसी प्रकार की छूट नहीं देती, जो उचित नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, अपीलकर्ता को 2026 एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाती है। चयन ट्रायल की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग डब्ल्यूएफआई कराएगा। वहीं, खेल मंत्रालय भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय ओलंपिक संघ से 2 स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करेगा। ये पर्यवेक्षक चयन ट्रायल की निगरानी करेंगे और लंबित रिट याचिका में एकल न्यायाधीश के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।
खंडपीठ ने कहा कि विनेश ने 2025 में विश्राम अवकाश के लिए आवेदन किया था। इसी कारण वह उस वर्ष आयोजित किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकीं, क्योंकि जुलाई 2025 में उन्होंने अपने बच्चे को जन्म दिया था। विनेश ने अपने अवकाश की जानकारी आईटीए और यूडब्ल्यूडब्ल्यू के साथ भारतीय खेल प्राधिकरण को भी दी थी। उन्हें 3 जुलाई 2025 को यह पुष्टि भी प्राप्त हुई कि वह 1 जनवरी 2026 से दोबारा प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेंगी।
कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई को फटकार लगाते हुए कहा, 29 अप्रैल 2025 को डब्ल्यूएफआई द्वारा जारी राष्ट्रीय कोचिंग शिविर दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि एशियाई खेलों के लिए प्रतिष्ठित खिलाडिय़ों को कोचिंग शिविर में भाग लिए बिना भी ट्रायल के लिए पात्र माना जा सकता है। ऐसे में मौजूदा नीति भेदभावपूर्ण प्रतीत होते हैं, क्योंकि इनमें मातृत्व अवकाश के कारण विश्राम लेने वाली अपीलकर्ता जैसी प्रतिष्ठित खिलाड़ी पर विचार करने का कोई विवेकाधिकार नहीं दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा, कानून का यह स्थापित सिद्धांत है कि मातृत्व के कारण किसी महिला के रोजगार, करियर, रैंकिंग या पदोन्नति पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाला जा सकता। इसलिए याचिका में इन नीतियों और परिपत्र की गुण-दोष के आधार पर जांच की जानी आवश्यक है।
विनेश ने पिछले साल संन्यास से वापस लौटने का फैसला किया था। वह कुश्ती में वापसी करना चाहती थीं, लेकिन डब्ल्यूएफआई ने उनके खिलाफ नियमों और पात्रता को लेकर सवाल उठाए। डब्ल्यूएफआई ने विनेश पर संन्यास के बाद नियमों का पालन न करने, घरेलू टूर्नामेंट नहीं खेलने और डोप टेस्ट नहीं देने के आरोप लगाए हैं। डब्ल्यूएफआई का कहना है कि चयन नियम पूरे न होने के कारण उन्हें ट्रायल में हिस्सा नहीं दिया गया।
००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

