नई दिल्ली,25 मई (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र, बाल अधिकार संस्था राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें ऑर्केस्ट्रा, डांस ग्रुप, मसाज पार्लर और स्पा में बच्चों और किशोरों को काम पर रखने पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की गई है.
यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच के सामने आया. सीनियर वकील एच एस फुल्का ने बेंच के सामने बाल अधिकार संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की तरफ से बात की.
सुनवाई के दौरान, फुल्का ने दलील दी कि 10 और 11 साल की नाबालिग लड़कियों को ऑर्केस्ट्रा और डांस बार में काम पर रखा जाता है. उन्होंने कहा, स्पा और मसाज पार्लर के लिए, कुछ राज्यों ने कम से कम 18 साल की उम्र का नियम बनाया है.
बेंच ने फुल्का की बातों पर ध्यान देते हुए केंद्रीय श्रम और कानून एवं न्याय मंत्रालयों को नोटिस जारी किए. सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को गंभीर बताया. बेंच ने याचिका राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी नोटिस जारी किए.
याचिका में कहा गया, केंद्र सरकार को निर्देश देने के लिए एक रिट या उचित निर्देश जारी करें… कि वह चाइल्ड एंड एडोलसेंट लेबर एक्ट, 1986 के सेक्शन 4 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करे, जिसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चों को ऑर्केस्ट्रा, डांस बार, डांस ग्रुप, नौटंकी परफॉर्मेंस, मसाज पार्लर, स्पा और सैलून, या ऐसी ही किसी भी जगह पर काम करने या परफॉर्म करने को शामिल किया जाए, जो बच्चों को अश्लील या शोषण वाले तरीके से दिखाती हो, बाल और किशोर श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम के शेड्यूल के पार्ट ए में, जिससे ऐसे काम पर पूरी तरह से रोक लगे.
याचिका में आरोप लगाया गया कि ये सेक्टर देश भर में नाबालिग लड़कियों की संगठित तस्करी, यौन शोषण और जबरन मजदूरी के लिए गुप्त मोर्चे बन गए हैं.
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