झारखंड आंदोलनकारियों के अधिकारों की रक्षा की मांग को दबाया नहीं जा सकता: पुष्कर महतो
भरनो 25 मई (आरएनएस)। झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा गुमला जिला के तत्वावधान में भरनो प्रखंड कार्यालय परिसर में सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का आगाज झारखंड आंदोलनकारी के राजकीय मान सम्मान अलग पहचान रोजी रोजगार नियोजन के गारंटी तथा जेल जाने की बाध्यता समाप्त कर सभी को सम्मान पेंशन राशि 50-50 हजार रुपया देने के मुद्दे को लेकर दो जून की रोटी के लिए 10 जून को मुख्यमंत्री आवास के समक्ष घेराव – प्रदर्शन, आमरण तथा आत्मदाह कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया गया तथा भरनो बाजार से ब्लॉक परिसर तक जुलूस निकाला गया. न्याय के साथ सामान दो- समझ में स्वाभिमान से जीने का अधिकार दो, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को झारखंड आंदोलनकारी का सर्वोच्च सम्मान दो, झारखंड आंदोलनकारी जिंदाबाद, जयपाल सिंह मुंडा अमर रहे,सी पी तिर्की अमर रहे, अजीत तिग्गा अमर रहे,शिबू सोरेन अमर रहे का नारा लगाया गया है. मौके पर मुख्य अतिथि झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक प्रधान सचिव पुष्कर महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों के अधिकारों की रक्षा की मांग को न दबाया जा सकता है,न मिटाया जा सकता है. झारखंड के अस्तित्व , अस्मिता, पहचान जिंदा है झारखंड आंदोलनकारियों के त्याग और बलिदान से. अबुआ सरकार में झारखंड आंदोलनकारी उपेक्षित हैं. राज्य में सरकार के संकल्प एवं आश्वासन का पालन नहीं किया जा रहा है जिसके कारण 10 जून को झारखंड आंदोलनकारियों के द्वारा धरना – प्रदर्शन , आमरण अनशन, आत्मदाह किया जाएगा.दक्षिणी छोटा नागपुर प्रमंडल की अध्यक्ष रोजलीन तिर्की ने एलान की कि 10 जून को सरकार हमारी बातों में शांतिपूर्वक विचार नहीं करेगी मैं स्वयं आत्मदाह कर अंत कर दूंगी. केंद्रीय सचिव पुनीत उरांव ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी की आवाज को आप दबाया नहीं जा सकता है अपने बाल बच्चों के अधिकारों को हम लोग संघर्ष और शहादत देकर लेकर रहेंगे.
स्वागत भाषण श्रीमती नीलू देवी संचालन आनंद उरांव ने की. सभा में स्वर्गीय महेश कुमार धान के निधन पर शोक व्यक्त किया गया.
इस अवसर पर प्रभारी अनथन लकड़ा, प्रकाश खलखो,पंचास बाड़ा, मिनि बाङा , जयराम उरांव, आनंद उरांव, लच्छू मुंडा, बसंत तिर्की,साधु उरांव,बंधु उरांव, सीताराम उरांव, गोबरा उरांव, पंचू उरांव, देवनिका उरांव, कारी उरांव, सुक्रस उरांव, चंपा उरांव, कृष्णा उरांव सहित अन्य प्रमुख थे.
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

