रायपुर 27 मई (आरएनएस) बलरामपुर के छोटे से गांव महाराजगंज की एक महिला ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो खेत, डबरी और छोटी सी दुकान भी जिंदगी बदल सकती है। गुलाब महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य उमा सिंह आज गांव की महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं। कभी सीमित संसाधनों में जीवन गुजारने वाली उमा अब “लखपति दीदी” के नाम से पहचानी जा रही हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी अभियान ने उमा सिंह की जिंदगी की तस्वीर बदल दी। समूह से जुड़ने के बाद उमा ने चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज के जरिए कुल 85 हजार रुपये का ऋण लिया। इस राशि को खर्च नहीं बल्कि निवेश बनाया।
उमा ने 2.5 एकड़ जमीन में धान और 1.5 एकड़ में मक्का की खेती शुरू की। साथ ही अपनी डबरी में मछली पालन कर अतिरिक्त आय का रास्ता खोला। खेतों की मेहनत के बाद शाम को महाराजगंज चौक में चना-चाट की दुकान लगाकर रोज कमाई भी शुरू की। मेहनत का नतीजा ऐसा निकला कि इस साल उमा को धान बिक्री से 1 लाख 42 हजार रुपये, मक्का से 16 हजार रुपये और मत्स्य पालन से 20 हजार रुपये की आमदनी हुई।
उमा की सफलता अब आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी कहानी देखकर कई महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ रही हैं और खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन व छोटे व्यवसाय की ओर कदम बढ़ा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की यह बढ़ती भागीदारी गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रही है।
बहरहाल, उमा सिंह की कहानी यह बता रही है कि आत्मनिर्भर भारत का असली चेहरा अब गांव की महिलाएं बन रही हैं, जो मेहनत, हौसले और आत्मविश्वास से अपनी तकदीर खुद लिख रही हैं।

