गरियाबंद,28 मई (आरएनएस)। सुशासन तिहार आम नागरिकों के लिए केवल समस्या समाधान का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आजीविका को मजबूत करने का सशक्त अभियान बनता जा रहा है। गत् दिवस फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम बोरसी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में ग्राम सेंदर के मछली पालक नारायण निषाद एवं तीरथ निषाद को राज्य पोषित योजना अंतर्गत क्रमश: जाल एवं आइस बॉक्स प्रदान किया गया। जिससे दोनों हितग्राहियों के आजीविका कार्य को नई दिशा मिली है।ग्राम सेंदर निवासी नारायण निषाद पिछले लगभग 20 वर्षों से मछली पालन का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने 3 एकड़ के तालाब को 5 वर्षों के लिए 12 हजार रुपये वार्षिक किराए पर लेकर मछली पालन शुरू किया। लगातार मेहनत और अनुभव के दम पर वे आज अच्छी आय अर्जित कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष उन्होंने अपने तालाब में लगभग 1 लाख मछली बीज डलवाया है, जो आगामी 5 से 6 महीनों में विक्रय योग्य हो जाएगा। नारायण निषाद ने बताया कि अब तक उन्हें मछली पकडऩे के लिए किराए के जाल पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता था। सुशासन तिहार के शिविर में शासन द्वारा जाल उपलब्ध कराए जाने से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। अब वे बिना अतिरिक्त खर्च के स्वयं मछली उत्पादन एवं विक्रय का कार्य कर सकेंगे। जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।इसी प्रकार ग्राम सेंदर के तीरथ निषाद भी लंबे समय से मछली पालन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने 5 एकड़ तालाब को 5 वर्षों के लिए 80 हजार रुपये में लीज पर लेकर मछली पालन का कार्य शुरू किया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग डेढ़ क्विंटल मछली बीज तालाब में डलवाया गया है, जिससे भविष्य में बेहतर उत्पादन और मुनाफे की उम्मीद है। तीरथ निषाद गांवों एवं बाजारों में घूम-घूमकर मछलियों का विक्रय करते हैं। सुशासन तिहार शिविर में उन्हें आइस बॉक्स प्रदान किया गया। जिससे अब वे मछलियों को लंबे समय तक ताजा रख सकेंगे। इससे मछलियों की गुणवत्ता बनी रहेगी और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि पहले गर्मी के मौसम में मछलियों को सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण होता था, लेकिन अब आइस बॉक्स मिलने से विक्रय कार्य और अधिक आसान हो जाएगा।दोनों हितग्राहियों ने शासन की इस पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग का आभार जताया। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं का लाभ समय पर मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे व्यवसायियों और किसानों को आत्मनिर्भर बनने में बड़ी सहायता मिल रही है। प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा मछली पालन जैसे आजीविका आधारित कार्यों को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रही है।
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