नई दिल्ली ,29 मई ,। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आने वाले समय में बड़ी राहत की खबर सामने आ सकती है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों के बीच अब पेंशन व्यवस्था में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार कर्मचारियों को अपनी पसंद के अनुसार पेंशन विकल्प चुनने की सुविधा देने पर विचार कर रही है।
पेंशन सिस्टम में बदलाव की तैयारी?
मीडिया रिपोर्ट्स और कर्मचारी संगठनों के सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ऐसी नई व्यवस्था पर मंथन कर रही है जिसमें कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन को लेकर अधिक विकल्प और सुरक्षा मिल सके। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों का दावा है कि आने वाले कुछ महीनों में इस दिशा में अहम फैसला लिया जा सकता है।
मौजूदा व्यवस्था क्या है?
फिलहाल 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त अधिकांश केंद्रीय कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम (हृक्कस्) के तहत आते हैं। इस योजना में कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं, जबकि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन बाजार आधारित निवेश और रिटर्न पर निर्भर रहती है।
इसके पहले पुरानी पेंशन योजना (ह्रक्कस्) लागू थी, जिसमें कर्मचारियों को अंतिम वेतन और महंगाई भत्ते के आधार पर निश्चित पेंशन की गारंटी मिलती थी। वहीं हाल ही में सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (क्कस्) लागू की, जिसमें ह्रक्कस् और हृक्कस् दोनों की विशेषताओं को शामिल करने की कोशिश की गई है।
कर्मचारियों की क्या मांग है?
कर्मचारी संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि कर्मचारियों को ह्रक्कस्, हृक्कस् और क्कस् जैसे विकल्पों में चयन की स्वतंत्रता दी जाए, ताकि उन्हें भविष्य को लेकर अधिक भरोसा और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
ऑल इंडिया हृक्कस् एम्प्लॉइज फेडरेशन (्रढ्ढहृक्कस्श्वस्न) समेत कई कर्मचारी संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के सामने यह मुद्दा उठाया है। यूनियनों का कहना है कि हृक्कस् पूरी तरह बाजार पर आधारित होने के कारण कर्मचारियों में रिटायरमेंट के बाद आर्थिक अस्थिरता की चिंता बनी रहती है। इसलिए सुनिश्चित पेंशन व्यवस्था की मांग लगातार तेज हो रही है।
ङ्कक्रस् नियमों में भी बदलाव की मांग
पेंशन के साथ-साथ स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (ङ्कक्रस्) से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग भी उठ रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान नियमों में संशोधन कर कर्मचारियों को अधिक लाभ और स्पष्टता दी जानी चाहिए।
कब तक आएंगी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें?
जानकारी के अनुसार, आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें वर्ष 2027 की पहली छमाही तक सरकार को सौंपी जा सकती हैं। आयोग फिलहाल विभिन्न कर्मचारी संगठनों और यूनियनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। सरकार द्वारा आयोग के लिए विशेष वेबसाइट भी शुरू की गई है, जहां कर्मचारियों से सुझाव मांगे गए हैं। माना जा रहा है कि सभी पक्षों से चर्चा पूरी होने के बाद आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद वेतन, भत्तों और पेंशन को लेकर बड़े फैसले सामने आ सकते हैं।
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