नई दिल्ली ,29 मई ,। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (श्वक्कस्नह्र) अपने सब्सक्राइबर्स के लिए एक बेहद क्रांतिकारी और हाईटेक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘श्वक्कस्नह्र 3.0Ó लॉन्च करने की पूरी तैयारी कर चुका है। इस नए सिस्टम के लाइव होने के बाद पीएफ (क्कस्न) सदस्यों को अपने फंड तक बेहद तेज और आसान पहुंच मिलेगी। सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव यह होने जा रहा है कि अब पीएफ सदस्यों को यूपीआई (क्कढ्ढ) के माध्यम से सीधे अपने बैंक अकाउंट में पीएफ का पैसा ट्रांसफर करने की आधुनिक सुविधा मिलेगी।
इस कदम से न केवल कागजी कार्रवाई खत्म होगी, बल्कि क्लेम प्रोसेसिंग का समय भी घटकर चंद मिनटों का रह जाएगा। हालांकि, इस बेहद सुविधाजनक अपडेट के बीच देश के 7 करोड़ से ज्यादा ईपीएफओ सदस्य इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वे नए नियमों के तहत अपने अकाउंट से अधिकतम कितनी राशि निकाल सकते हैं और क्या पूरा पैसा एक बार में निकाला जा सकता है? आइए जानते हैं ईपीएफओ 3.0 के तहत निकासी (ङ्खद्बह्लद्धस्रह्म्ड्ड2ड्डद्य) के नए और सटीक नियम क्या हैं।
क्या अकाउंट से निकाला जा सकता है पूरा पैसा?
प्रस्तावित ईपीएफओ 3.0 के तहत, तय नियमों और शर्तों के आधार पर सब्सक्राइबर्स को यूपीआई या यूपीआई-इनेबल्ड एटीएम (क्कढ्ढ श्वठ्ठड्डड्ढद्यद्गस्र ्रञ्जरू) के माध्यम से अपने कुल ईपीएफ फंड का 50 प्रतिशत से लेकर 75 प्रतिशत तक ही निकालने की अनुमति दी जाएगी। ईपीएफओ सामान्य परिस्थितियों में रिटायरमेंट से पहले पूरी राशि निकालने की इजाजत नहीं देता है और आगे भी पूरा अमाउंट एक साथ मिलने की उम्मीद नहीं है। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि पीएफ का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जाता है, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी का बुढ़ापा आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सके।
ईपीएफओ 3.0 के तहत निकासी के मुख्य नियम
अनिवार्य न्यूनतम शेष राशि (रूद्बठ्ठद्बद्वह्वद्व क्चड्डद्यड्डठ्ठष्द्ग): नए नियमों के मुताबिक, किसी भी आपात स्थिति में डिजिटल विड्रॉल करते समय ईपीएफ खाते में जमा कुल राशि का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से खाते में ही छोडऩा होगा। इस नियम का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आपकी भविष्य की बचत पूरी तरह से शून्य न हो जाए।
ऑटोमैटिक सेल्फ सेटलमेंट लिमिट बढ़ी: ईपीएफओ ने एडवांस क्लेम (अग्रिम दावों) के लिए ‘सेल्फ सेटलमेंटÓ की सीमा को 1 लाख रुपये से सीधे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आपका पात्र दावा 5 लाख रुपये तक का है, तो वह बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के बेहद कम समय में ऑटोमैटिक तरीके से पास होकर आपके खाते में आ जाएगा।
केवल इन विशेष परिस्थितियों में ही निकाल सकेंगे एडवांस फंड
यूपीआई आधारित इस डिजिटल सुविधा के जरिए आप जब चाहें तब पैसा नहीं निकाल पाएंगे। इसके लिए विभाग ने कुछ विशेष और आपातकालीन परिस्थितियां तय की हैं। सदस्य केवल मेडिकल इमरजेंसी (स्वास्थ्य संकट), बच्चों की हायर एजुकेशन (उच्च शिक्षा), खुद की या भाई-बहन/बच्चों के विवाह के खर्चे, और नया घर खरीदने या बनवाने जैसी जरूरी आवश्यकताओं के लिए ही इस फंड को एडवांस के रूप में निकाल सकेंगे।
जानिए कब लॉन्च होगा बहुप्रतीक्षित श्वक्कस्नह्र 3.0?
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश को खुशखबरी देते हुए बताया कि यूपीआई आधारित इस विड्रॉल सिस्टम की तकनीकी टेस्टिंग (ञ्जद्गह्यह्लद्बठ्ठद्द) का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षण के दौरान सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और सटीक पाया गया है, जिसके माध्यम से निकाला गया पैसा सीधे सदस्य के लिंक बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाता है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ ही हफ्तों में इस बेहतरीन सुविधा को देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया जाएगा।
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