कांग्रेस पार्षद दल ने सत्ता पक्ष पर लगाया आरोप
जबलपुर 2 जून (आरएनएस)। केंद्र, राज्य और नगर निगम में एक ही दल की सरकार होने के बावजूद जबलपुर नगर निगम गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। यह आरोप कांग्रेस पार्षद दल ने नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित पत्रकार वार्ता में लगाया। कांग्रेस का कहना है कि आर्थिक बदहाली के कारण शहर के विकास कार्य ठप पड़े हैं और नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
कांग्रेस पार्षद दल ने आरोप लगाया कि नगर निगम में वित्तीय अनियमितताओं और भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ठेकेदार निविदाओं में रुचि नहीं ले रहे हैं। स्थिति यह है कि कई कार्यों के लिए पांच से छह बार तक निविदाएं जारी की गईं, लेकिन किसी भी ठेकेदार ने भाग नहीं लिया। इसके चलते शहर की अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाएं अधर में लटक गई हैं।
नेता प्रतिपक्ष अमरीश मिश्रा ने कहा कि पार्षदों को वार्ड विकास कार्यों के लिए मिलने वाले 90 लाख रुपये के बजट से जुड़े पुराने वित्तीय वर्ष के कार्य भी अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। वहीं नए वित्तीय वर्ष के कार्यों की प्रक्रिया भी तीन महीने बीत जाने के बाद शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम में 150 से अधिक ऐसी निविदाएं हैं, जिन्हें बार-बार जारी करना पड़ा, लेकिन ठेकेदारों ने उनमें रुचि नहीं दिखाई।
कांग्रेस का आरोप है कि भुगतान में देरी, जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया और कथित भ्रष्टाचार के कारण ठेकेदार काम लेने से बच रहे हैं। पार्षद दल का कहना है कि ठेकेदारों को कार्य आदेश मिलने के बाद भी भुगतान के लिए कई स्तरों से गुजरना पड़ता है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शहर में पानी, सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने नगर निगम प्रशासन और महापौर पर वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विकास कार्यों के दावों के विपरीत जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक हैं।
कांग्रेस पार्षद दल ने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में “ट्रिपल इंजन सरकार” का लाभ जबलपुर को मिल रहा है, तो फिर दिल्ली और भोपाल से नगर निगम को पर्याप्त वित्तीय सहायता क्यों नहीं मिल रही है। पार्षदों ने दावा किया कि उन्होंने पत्रकारों के समक्ष उन निविदाओं के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं, जिनमें कई बार आमंत्रण जारी होने के बावजूद ठेकेदारों ने भाग नहीं लिया।
कांग्रेस ने नगर निगम की वित्तीय स्थिति की जांच कराने और विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की है। वहीं नगर निगम की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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