नई दिल्ली 03 June (Rns) : ग्रेट निकोबार द्वीप मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को इस परियोजना के खिलाफ गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए दावा किया है कि इससे क्षेत्र में बड़ी ‘इकोलॉजिकल तबाही’ (पारिस्थितिक विनाश) हो सकती है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को एक विस्तृत पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकार ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन यानी एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) के जरूरी और स्थापित मानकों को नजरअंदाज करके इस परियोजना को मंजूरी दी है।
पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
जयराम रमेश ने अपने पत्र में कहा कि परियोजना के लिए तैयार की गई ईआईए (EIA) रिपोर्ट खुद इस बात को स्वीकार करती है कि यह केवल एक त्वरित अध्ययन (रैपिड रिकॉनिसेंस स्टडी) था, जिसके लिए आंकड़े महज एक मौसम चक्र के दौरान जुटाए गए थे। उन्होंने तर्क दिया कि द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों से जुड़ी इतनी बड़ी परियोजनाओं के लिए हर मौसम (बहु-मौसमी) का विस्तृत अध्ययन अनिवार्य होता है। केवल सेकेंडरी डेटा के आधार पर इतने विशाल प्रोजेक्ट को हरी झंडी देना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरण अध्ययन तैयार करने वाली एजेंसियों ने खुद ही अपने काम की समीक्षा की है, जो इसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है

