आपरेशन कंविक्शन का बड़ा असर:
करीब सवा तीन के ट्रायल के बाद स्वजन को मिला इंसाफ
18 फरवरी 2023 को लालगंज क्षेत्र में हुई थी हैवानियत
बस्ती 3 जून (आरएनएस)। अदालत ने दुष्कर्म और हत्या के एक वीभत्स मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस की ओर से तैयार की गई मजबूत चार्जशीट और आपरेशन कंविक्शन के तहत की गई प्रभावी पैरवी ने इस मामले में दोषसिद्धि (कंविक्शन) सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह घटना 18 फरवरी 2023 को लालगंज क्षेत्र में घटी थी। आरोपित मिथुन राजभर निवासी भुवनी, लालगंज ने आठ वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसकी हत्या कर दी थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर भारी आक्रोश देखा गया था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक वादिनी मुकदमा के भाई भरथरी के लड़के सूरज की शादी थी। शाम के लगभग साढ़े पांच बजे घर के सभी पुरुष सदस्य कैम्पियरगंज, गोरखपुर बरात में गये हुए थे। जब दूसरे दिन वह घर लौटकर आए। आठ वर्षीय मासूम रात में महिलाएं के साथ नाच गाना कर रही थी। रात लगभग 10 बजे वह अचानक गायब हो गई। घर वाले बच्ची को खोजने लगे। जब वह नहीं मिली तो पीआरवी यूपी 112 को फोन किया। रात भर तलाशते रहे दूसरे दिन गांव के बगल गड्ढा युक्त कीचड़ में लाश मिली। आरोपित मिथुन भी लोगों के साथ शव को खोजने लगा रहा और सबसे पहले उसने ही मासूम की लाश कीचड़ मे से निकालना शुरु किया। लाश निकालने के बाद एक प्रार्थना पत्र लिखकर थाने पर अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराया गया । जब इस ब्लाइंड मर्डर व दुष्कर्म की
विवेचना हुई मिथुन राजभर का नाम प्रकाश में आया और पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किय।न्यायालय मे शासकीय अधिवक्ता ने मृत्युदण्ड की मांग किया । न्यायाधीश ने पक्षो को सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर मिथुन को दोषी मानते हुए दंडित किया है।
पुलिस की तत्परता और आपरेशन कंविक्शन
इस मामले को आपरेशन कंविक्शन के तहत चिन्हित किया गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वैज्ञानिक साक्ष्यों, फारेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों को आधार बनाकर एक सालिड चार्जशीट तत्कालिन थानाध्यक्ष महेश कुमार सिंह ने पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तैयार की थी। थानेदार ने न केवल समय पर चार्जशीट अदालत में दाखिल की, बल्कि मुकदमे के दौरान सरकारी वकील विशेष शासकीय अधिवक्ता अखिलेश दुबे के साथ मिलकर तकनीकी बिंदुओं पर मजबूती से पैरवी की। सरकारी वकील ने अदालत के समक्ष ठोस दलीलें रखीं, जिससे आरोपित को जमानत मिलने के सभी रास्ते बंद हो गए और अंतत: उसे सजा तक पहुंचाया गया।
विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट की अदालत का फैसला:
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए तथ्यों का गहन अवलोकन किया। दोष सिद्ध होने पर अदालत ने आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने आरोपित पर 45 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
न्याय व्यवस्था में बढ़ा विश्वास
इस फैसले पर पीडि़त पक्ष के परिजनों ने संतोष व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मुस्तैदी और आपरेशन कंविक्शन के तहत अपराधियों को सजा दिलाने की मुहिम से समाज में एक कड़ा संदेश गया है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में स्पीडी ट्रायल और प्रभावी पैरवी ही न्याय की नींव को मजबूत करती है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

